भारत ने चावल और गेहूं के लिए MSP रिपोर्टिंग पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया के आरोपों को किया खारिज
28-Nov-2024 12:43 PM
न्यूयॉर्क। पांच देशों—अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अर्जेंटीना और यूक्रेन—ने WTO में भारत पर चावल और गेहूं के लिए अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को "कम रिपोर्ट" करने का आरोप लगाया।
इन देशों ने 2021-23 के लिए भारत की अधिसूचनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत ने चावल और गेहूं के लिए अपने बाजार मूल्य समर्थन (MSP) को "ड्रामेटिक तरीके से कम आंका" है।
अपना पक्ष रखते हुए भारत ने कहा कि यह आरोप जल्दबाजी, भ्रामक और अनावश्यक हैं। भारत ने हमेशा WTO की घरेलू सहायता अधिसूचना के सभी दायित्वों का पालन किया है।
यह आरोप WTO के नियमों की चयनात्मक व्याख्या पर आधारित है। आरोप लगाया गया कि भारत का चावल के लिए MSP दो वर्षों में उत्पादन मूल्य (VoP) का 87% से अधिक था तथा गेहूं के लिए MSP 67-75% के बीच था। WTO के नियमों के अनुसार, विकासशील देशों के लिए VoP का 10% से अधिक MSP प्रतिबंधित है।
शिकायत करने वाले देशों ने कहा कि भारत ने पूरी उत्पादन क्षमता को ध्यान में रखते हुए MSP की गणना की, न कि केवल उस उत्पादन की, जो वास्तव में सब्सिडी प्राप्त करता है।
भारत की अधिसूचनाओं को अमेरिकी डॉलर में प्रस्तुत किया गया, जबकि घरेलू समर्थन प्रतिबद्धताएं भारतीय रुपये में थीं।भारत ने कहा कि WTO की कृषि समझौते में MSP की गणना के लिए स्पष्ट परिभाषा नहीं है।
भारत ने चावल के लिए WTO की 10% सीमा को कई बार पार करने पर शांति खंड का इस्तेमाल किया है, लेकिन गेहूं के लिए ऐसा कभी नहीं किया।
भारत ने कहा कि विकासशील देशों को अपनी कमजोर आबादी की सुरक्षा के लिए अधिक लचीलापन दिया जाना चाहिए। न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और उरुग्वे जैसे देशों ने भारत के खिलाफ प्रस्तुतियों का समर्थन किया। भारत ने इन देशों से आग्रह किया कि वे अपनी अधिसूचनाओं को प्राथमिकता दें और मुद्दों पर पारदर्शिता बनाए रखें।
