भारतीय गेहूं की खरीद में अनेक देशों की दिलचस्पी

13-Apr-2026 03:48 PM

नई दिल्ली। लगभग चार साल तक प्रतिबन्ध लागू रखने के बाद केंद्र सरकार ने इस वर्ष गेहूं का निर्यात खोल दिया है। भारतीय गेहूं की खरीद में बांग्लादेश, म्यांमार एवं इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों के साथ-साथ मिस्र जैसे अफ्रीकी देश के आयातक भी अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। शीघ्र ही कई अन्य देश भी इस सूची में शामिल हो सकते हैं।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा शीघ्र ही निर्यातक फार्मों को गेहूं का निर्यात कोटा आवंटित किए जाने की सम्भावना है। समीक्षकों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक बाजार में गेहूं की आपूर्ति आंशिक रूप से प्रभावित हो रही है इसलिए भारत से इसके निर्यात का परिदृश्य बेहतर नजर आ रहा है।

ध्यान देने की बात है कि फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं के निर्यात की अनुमति प्रदान की थी और गेहूं उत्पादों का निर्यात कोटा भी 5 लाख टन बढ़ाकर 10 लाख टन नियत किया था। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 1202.10 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान व्यक्त किए जाने तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास 220 लाख टन से ज्यादा गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद रहने से सरकार को इसके निर्यात की अनुमति देने में ज्यादा हिचकिचाहट नहीं हुई। अब निर्यात की तैयारी शुरू हो रही है।

बांग्लादेश को भारत से भेजे जाने वाले गेहूं का निर्यात मूल्य 275-280 डॉलर प्रति टन बैठ रहा है जिसमें परिवहन खर्च भी शामिल है। यह लाभप्रद एवं आकर्षक मूल्य स्तर हैं। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया के अनुसार हाल के प्रतिकूल मौसम से गेहूं की क्वालिटी थोड़ी-बहुत प्रभावित हुई है लेकिन निर्यात पर इसका कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।