बम्पर उत्पादन के अनुमान के बावजूद गेहूं की आवक एवं खरीद की गति धीमी

20-May-2024 10:41 AM

नई दिल्ली । हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2023-24 के वर्तमान सीजन के दौरान गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर 1120.20 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है लेकिन इसके अनुरूप न तो मंडियों में इसकी आवक हो रही है और न ही सरकारी खरीद की गति तेज है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे दाम की उम्मीद से बड़े-बड़े उत्पादकों ने गेहूं का स्टॉक दबाना शुरू कर दिया है। उसे आगामी महीनों में गेहूं का भाव मौजूदा स्तर के मुकाबले 300-400 रूपए प्रति क्विंटल तक बढ़ने का भरोसा है।

निस्संदेह कम मात्रा में गेहूं की खरीद होना सरकार के लिए चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि इससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पर्याप्त मात्रा में इस महत्वपूर्ण अनाज की आरती करने तथा घरेलू बाजार भाव को नियंत्रित करने हेतु खुले बाजार बिक्री योजना को दोबारा शुरू करने में कठिनाई हो सकती है।

चालू रबी मार्केटिंग सीजन के आरंभ में केन्द्रीय बफर स्टॉक में बेशक करीब 75 लाख टन गेहूं का भंडार बचा हुआ था जो न्यूनतम आवश्यक मात्रा के आसपास ही था। 

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के बम्पर उत्पादन अनुमान के आधार पर खाद्य मंत्रालय ने चालू रबी सीजन के लिए 372.90 लाख टन गेहूं की खरीद का महत्वकांक्षी लक्ष्य नियत किया है लेकिन इसके सापेक्ष 17 मई तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एवं उसकी सहयोगी एजेंसियों को केवल 257 लाख टन गेहूं खरीदने में सफलता मिल सकी।

मंडियों में तथा सरकारी क्रय केन्द्रों पर लगातार घटती आवक को देखते हुए इतना तो निश्चित हो गया है कि गेहूं की वास्तविक सरकारी खरीद कुछ निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे रह जाएगा- लेकिन कितना पीछे रहेगा, यह जून में ही पता चल पाएगा

जब खरीद की प्रक्रिया समाप्त होगी। मध्य प्रदेश और राजस्थान में न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर 125 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देने का निर्णय भी काम नहीं आ रहा है।