बारिश से क्वालिटी खराब होने के कारण कपास का भाव एमएसपी से नीचे आया
18-Sep-2025 08:04 PM
भटिंडा। पिछले कुछ दिनों के अंदर पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान जैसे उत्तरी राज्यों की विभिन्न मंडियों में 2025-26 सीजन की पहली तुड़ाई से प्राप्त कपास की करीब 6000 गांठ पहुंची।
इसके साथ पुराने स्टॉक का कुछ माल भी मंडियों मे आया लेकिन क्वालिटी सामान्य स्तर की नहीं होने से इसका भाव कमजोर रहा और इसकी लिवाली में खरीदारों की दिलचस्पी कम देखी गई। इस नरमा कपास में बिनौला भी मौजूद रहता है। बाद में जिनिंग मिलिंग के माध्यम से रूई तथा बिनौला को अलग-अलग किया जाता है।
खरीदारों की कम दिलचस्पी के कारण मंडियों में आने वाली इस कपास का भाव नीचे में 5500 रुपए से लेकर ऊपर में 7200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किया गया
जो सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 500 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल तक नीचे रहा। ज्ञात हो कि केन्द्र सरकार ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन हेतु कपास का एमएसपी 589 रुपए बढ़ाकर मीडियम रेशेवाली श्रेणी के लिए 7710 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों के लिए 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में मुख्यतः मीडियम रेशेवाली कपास का उत्पादन होता है जबकि कहीं-कहीं मीडियम लम्बे रेशेवाली कपास की पैदावार भी होती है जिसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 7860 रुपए प्रति क्विंटल नियत हुआ है।
फाजिल्का मंडी में गत सप्ताह नई कपास की आवक शुरू हुई लेकिन इसकी मात्रा कम और धीमी गति देखी जा रही है क्योंकि पंजाब में भारी वर्षा एवं बाढ़ से न केवल नई फसल की तुड़ाई-तैयारी में बाधा पड़ रही है बल्कि फसल क्षतिग्रस्त भी हुई है।
हालांकि किसान अगस्त के अंतिम सप्ताह से ही नई फसल की तुड़ाई-तैयारी के लिए प्लान बना चुके थे लेकिन मूसलाधार वर्षा ने इस प्लान को विफल कर दिया। कपास का भाव एमएसपी के कहीं आसपास भी नहीं है। फाजिल्का मंडी में दाम 6600 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा जिससे किसान काफी आहत हैं।
हरियाणा तथा राजस्थान की मंडियों में कपास की सीमित आवक हो रही है और इसका दाम भी एमएसपी से काफी नीचे चल रहा है। खरीदारों का कहना है कि कपास में नमी का अंश बहुत ज्यादा है।
फिलहाल कपास की नम आवक के साथ कीमत भी कमजोर बनी हुई है। समीक्षकों के मुताबिक यदि मौसम साफ तथा अनुकूल रहा तो आगामी सप्ताहों में दूसरे एवं तीसरे चरण की तुड़ाई-तैयारी के दौरान कपास की आपूर्ति बढ़ सकती है और तब इसका दाम भी कुछ मजबूत हो सकता है।
