बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए लाभदायक नहीं
10-Feb-2025 08:30 PM
नई दिल्ली । देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान आदि में तापमान बढ़ने लगा है जिससे फसल के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है। राजस्थान एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्मी का ज्यादा प्रकोप देखा जा रहा है।
गेहूं की फसल के लिए वर्तमान समय काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसमें फूल तथा दाना लगने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे समय में पौधों का स्वस्थ विकास होना आवश्यक है जबकि तेज धूप इसमें बाधक बन सकती है।
हालांकि मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता का हवाला देते हुए 12 फरवरी तक देश के कुल राज्यों में बारिश तथा पहाड़ी प्रांतों ओलावृष्टि होने की संभावना व्यक्त की है लेकिन इसका सीमित दायरा रहेगा और अवधि भी छोटी रहेगी।
दिन और रात के तापमान में अंतर घटने से स्थिति विषम हो सकती है। अभी फरवरी का करीब एक तिहाई भाग ही गुजरा है।
अगर आगामी सप्ताहों के दौरान मौसम में ठंडक का अभाव रहा तो गेहूं के दाने की संख्या घटने तथा क्वालिटी खराब होने की आशंका बढ़ जाएगी।
केन्द्र सरकार ने 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन में 1150 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन का लक्ष्य नियत किया है। बिजाई क्षेत्र में हुई अच्छी बढ़ोत्तरी को देखते हुए गेहूं का उत्पादन बढ़ाने की उम्मीद जगी थी लेकिन मौसम जिस तेजी से करवट बदल रहा है उससे उत्पादन का लक्ष्य बहुत दूर नजर आ रहा है।
2023-24 सीजन के दौरान सरकार ने गेहूं का घरेलू उत्पादन 1133 लाख टन आंका था जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र का अनुमान 1000-1040 लाख टन के बीच था।
घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की जटिल स्थिति तथा कीमतों के ऊंचे स्तर को देखते हुए गेहूं उत्पादन का व्यापारिक अनुमान ही सही प्रतीत होता है।
इस बार भी गेहूं का घरेलू उत्पादन अधिक से अधिक 1100 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन इसके लिए फरवरी-मार्च का मौसम अनुकूल होना आवश्यक है।
