चालू माह के अंत तक अधिकांश चीनी मिलों के बंद होने की संभावना
21-Apr-2025 07:52 PM
नई दिल्ली। 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में राष्ट्रीय स्तर पर कुल 534 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग आरंभ हुई थी। इसमें से 496 इकाइयां 15 अप्रैल 2025 तक आते-आते बंद हो गई।
शेष 38 क्रियाशील प्लांटों में 22 मिलें उत्तर प्रदेश की हैं। इसमें 16 इकाइयां पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा शेष 6 इकाइयां राज्य के अन्य भाग में स्थित हैं। गन्ना की कम उपलब्धता के कारण इसकी क्रशिंग क्षमता का बहुत सीमित उपयोग हो रहा है।
प्राइवेट चीनी मिलों की शीर्ष संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) का कहना है कि इन 38 क्रियाशील इकाइयों में से अधिकांश मिलें अप्रैल के अंत तक बंद हो सकती हैं जबकि मध्य मई से पूर्व तमाम प्लांटों के बाद हो जाने की संभावना है।
महाराष्ट्र में कुल 200 इकाइयों में इस बार चीनी का उत्पादन शुरू हुआ था जिसमें से 199 इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं और केवल पुणे जिले में एक मिल क्रियाशील है। वह भी जल्द ही बंद हो सकती है।
कर्नाटक की चीनी मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं मगर वहां जुलाई से सितम्बर 2025 के दौरान गन्ना क्रशिंग का विशेष स्तर आयोजित होगा।
चालू मार्केटिंग सीजन में अक्टूबर 2024 से मध्य अप्रैल 2025 के दौरान देश में करीब 254 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ। जो 38 मिलें क्रियाशील हैं उसमें कितना उत्पादन होता है यह देखना दिलचस्प होगा।
कर्नाटक एवं तमिलनाडु में गन्ना क्रशिंग का जो विशेष सत्र आयोजित होगा उस पर भी नजर रखने की जरूरत पड़ेगी। ध्यान देने वाली बात है कि 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन के लिए इस्मा ने 264 लाख टन,
नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएफसीएसएफ) ने 259 लाख टन तथा ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (एआईएसटीए) ने 254 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया है।
ट्रेड एसोसिएशन का उत्पादन अनुमान पीछे छूट चुका है और इस्मा के अनुमान तक चीनी का उत्पादन पहुंचना मुश्किल लगता है। फेडरेशन का अनुमान वास्तविकता से अधिक निकट है। यह फेडरेशन सहकारी चीनी मिलों का संगठन है।
