चालू वित्त वर्ष में खाद्य सब्सिडी बजट- प्रावधानों को पार कर जाने का अनुमान
19-Sep-2025 08:45 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने 2025-26 के मौजूदा वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) के लिए खाद्य सब्सिडी के मद में 2.03 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया था लेकिन ऐसा प्रतीत होता है
कि खाद्य सब्सिडी की वास्तविक राशि इससे करीब 22,000 करोड़ रुपए आगे निकल जाएगी। इसका कारण यह है कि सरकार ने धान और गेहूं के न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी कर दी और भारतीय खाद्य निगम द्वारा किसानों से इसकी अधिक खरीद की गई।
सरकारी गोदामों में चावल तथा गेहूं का भरपूर स्टॉक मौजूद है और इसके भंडारण, रख रखाव तथा परिवहन पर विशाल धनराशि खर्च हो रही है। विभिन्न योजनाओं में आपूर्ति के लिए इसकी निकासी की गति धीमी है।
चावल का सरकारी स्टॉक तो न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा के ढाई गुणा से भी ज्यादा है जबकि गेहूं का स्टॉक भी पिछले चार साल के ऊंचे स्तर पर चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि सब्सिडी का 70 प्रतिशत से अधिक भाग अकेले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से खर्च होता है। केन्द्रीय आम बजट में निगम के लिए 1.40 लाख करोड़ रुपए की खाद्य सब्सिडी का प्रावधान किया गया है
जबकि निगम ने 2025-26 में इसकी वास्तविक राशि बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। खाद्य सब्सिडी की शेष राशि उन राज्यों को आवंटित की जाती है जहां खाद्यान्न की खरीद हेतु विकेंद्रीकृत क्रय प्रणाली प्रचलित हैं।
भारतीय खाद्य निगम सब्सिटी बजट में 15 प्रतिशत से अधिक का इजाफा होने की संभावना है जिसे देखते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अथवा मुफ्त राशन स्कीम के अंतर्गत सब्सिडी का कुल भार बढ़कर 2.25 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच जाने की उम्मीद है
जो वित्त वर्ष 2022-23 के 2.72 लाख करोड़ रुपए के बाद सबसे ऊंचा स्तर है चूंकि बजट प्रावधान 2.03 लाख करोड़ रुपए का ही था जबकि वास्तविक खर्च 2.25 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचने का अनुमान है इसलिए इसमें 22,000 करोड़ रुपए का भारी इजाफा हो जाएगा।
