चीन अमरीका के बीच व्यापार युद्ध से भारत को फायदा कम नुकसान ज्यादा

05-Mar-2025 03:52 PM

नई दिल्ली। अमरीका और चीन के बीच व्यापारिक संघर्ष घहराता जा रहा है। अमरीका ने चाइनीज वस्तुओं पर 20 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा दिया है जबकि चीन ने अमरीका के अनेक कृषि एवं खाद्य उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का निर्णय लिया है।

लेकिन इस व्यापार युद्ध से भारत को सीमित फायदा होने की संभावना है। चीन में अमरीकी रूई, मक्का, गेहूं, फल सब्जी एवं डेयरी उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क बढ़ाया जएगा लेकिन इसमें रूई को छोड़कर भारत किसी अन्य वस्तु का निर्यात वहां बढ़ाने में शायद सफल नहीं हो पाएगा। भारत से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है जबकि मक्का एवं सोयाबीन का निर्यात बहुत कम हो रहा है। 

दूसरी ओर यदि अमरीका चीन को निर्यात होने वाले अपने इन कृषि एवं खाद्य उत्पादों को भारतीय बाजार में उतारने का प्रयास करता है तो स्वदेशी किसानों की कठिनाई काफी बढ़ जाएगी।

भारत में आयात के ढांचे में यदि अमरीका को अनुकूल स्थिति नजर आई तो वह उसका भरपूर फायदा उठाने का प्रयास अवश्य करेगा।

इससे भारतीय किसानों का अहित होगा अमरीका में जीएम श्रेणी के मक्का, सोयाबीन एवं अन्य कृषि उत्पादों का उत्पादन ज्यादा होता है जबकि भारत में इसका आयात नहीं किया जाता है। इसके बावजूद छदम रूप में इसके आयात की आशंका बनी रहेगी।

भारत सरकार को आगामी खतरों को भांपते हुए नई व्यापारिक रणनीति बनानी होगी ताकि अमरीका से आयात पर अंकुश लगाया जा सके। 

अमरीका ने 2 अप्रैल 2025 से भारतीय सामानों (कृषि उत्पाद सहित) पर आयात शुल्क लगाने या बढ़ाने की घोषणा की है इसलिए भारत को भी बदले की कार्रवाई करते हुए अमरीकी उत्पादों पर नए सिरे से आयात शुल्क बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

ट्रम्प प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में सिर्फ अमरीकी हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है इसलिए भारत सरकार को भी उसके अनुरूप नीति बनाने का निर्णय लेना होगा।

चीन पहले भी भारतीय रूई का एक अग्रणी खरीदार रहा है और यदि वहां इसके आयात में 10-15 लाख गांठ की बढ़ोत्तरी होती है तो भारत को सीमित फायदा ही होगा। सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि भारतीय बाजार अमरीका उत्पादों का अड्डा (डम्पिंग ग्राउंड) न बन जाए।