चावल की 20 किस्मों को जीआई टैग देने का मामला विचाराधीन

11-Feb-2025 08:16 PM

चेनई। हालांकि भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा 20 किस्मों के चावल को भौगोलिक संकेतक का दर्जा (जीआई टैग) पहले ही प्रदान किया जा चुका है जिसका उत्पादन खास-खास  में होता है लेकिन अब भी 20 अन्य किस्मों के चावल को यह टैग देने का मामला उसके पास  लम्बित है। इसके लिए आवेदन सहित अन्य दस्तावेज जमा कर दिये गए है और इसका अध्ययन-विश्लेषण किया जा रहा है। 

जिन 20 किस्मों के चावल के लिए जी आई टैग का मामला विचारधीन है उसमें सीराग, साम्बा, शिवनी जीरा शंकर, धूमामल्ली, कनकचूर, शिगंगई, करुप्पू कबुनी, रामनाथपुरम, मूंगर, जम्मू कश्मीर रेड राइस और बड़ा कोल्लम पैडी राइस भी शामिल है।

केरल में उत्पादित होने वाले कलापाड चावल को छोड़कर अन्य किस्मों के धान की खेती 12,500 एकड़ से भी कम क्षेत्रफल में होती है।

कलापाड धान का क्षेत्रफल 30 हजार एकड़ के आसपास रहता है। इन किस्मों के धान चावल की उपज दर परम्परागत किस्मों से नीचे रहती है। सबसे ऊंची औसत उपज दर केरल कलापाड धान की 2200 किलो प्रति एकड़ रहती है। 

केन्द्र सरकार ने सभी किस्मों एवं श्रेणियों के साबुत चावल के निर्यात को पूरी तरह नियंत्रण मुक्त कर दिया है और अब केवल टुकड़ी चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है जिसे सितम्बर 2022 में लागू किया गया था।

बीच की अवधि में सफेद चावल के व्यापारिक निर्यात को प्रतिबंधित किया गया सेला चावल पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लगाया गया और बासमती चावल के लिए पहले 1200 डॉलर और फिर 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य निर्धारित किया गया। अब इन सभी पाबंदियों को हटा दिया गया है।

सफेद चावल के लिए भी कुछ समय तक 490 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) नियत किया गया था मगर उसे भी वापस ले लिया गया। अब चावल का निर्बाध एवं शुल्क मुक्त निर्यात हो रहा है।