चावल का विशाल स्टॉक सरकार के लिए बना सरदर्द

04-Jul-2025 12:24 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल में चावल का स्टॉक उछलकर पिछले 20 वर्षों के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है और खरीद कालीन धान का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से आगे चल रहा है जबकि अधिकांश प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून की अच्छी बारिश भी हो रही है।

1 जुलाई 2025 को केन्द्रीय पूल में 374.80 लाख टन चावल का विशाल स्टॉक मौजूद था जो 1 जून 2025 को उपलब्ध स्टॉक 379.90 लाख टन से 5.10 लाख टन कम होने के बावजूद बहुत ऊंचा है। इसके अलावा सरकार के पास 198.90 लाख टन धान का स्टॉक भी है जिसकी मिलिंग करवाई जा रही है। 

नियमानुसार 1 जुलाई को केन्द्रीय पूल में कम से कम 135.40 लाख टन चावल का स्टॉक मौजूद होना चाहिए जबकि वास्तविक स्टॉक इससे करीब तीन गुणा ज्यादा है। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत चावल की बिक्री संतोषजनक नहीं रही है।

भारत ब्रांड के तहत भी चावल की बिक्री सीमित है। राज्य सरकारों, प्रांतीय निगमों, सामुदायिक रसोई संचालकों, गैर सरकारी संगठनों तथा एथनॉल निर्माताओं को केन्द्रीय पूल से रियायती मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में चावल की खरीद का ऑफर दिया गया है लेकिन वहां भी उठाव की स्थिति उत्साहवर्धक नहीं है।

केवल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत चावल की सामान्य आपूर्ति की जा रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाने वाले चावल के सहारे विशाल स्टॉक को घटाना मुश्किल लगता है।

चूंकि सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल के व्यापारिक निर्यात को नियमों- नियंत्रणों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है इसलिए सरकारी स्तर पर चावल की निर्यात मांग लगभग समाप्त हो गई है। 

संक्षेप में कहा जाए तो केन्द्रीय पूल में चावल की आमद ज्यादा हो रही है जबकि वहां से इसकी निकासी की गति धीमी देखी जा रही है। विशाल स्टॉक के भंडारण एवं रख रखाव पर भारी-भरकम राशि खर्च हो रही है

जिससे खाद्य सब्सिडी बिल का आकार बढ़ रहा है। अक्टूबर से नए धान की खरीद शुरू होने के बाद चावल के सुरक्षित भंडारण का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।