चावल के वैश्विक बाजार भाव नरम रहने की संभावना
17-Sep-2025 05:50 PM
रोम। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में बाढ़-वर्षा से धान की फसल को हुए कुछ नुकसान के बावजूद वैश्विक स्तर पर चावल का पर्याप्त उत्पादन होने एवं ऊंचा स्टॉक मौजूद रहने की उम्मीद है और इसके अनुरूप मांग नहीं होने पर कीमतों में थोड़ी और नरमी आने की संभावना है जबकि पहले से ही इसका वैश्विक बाजार भाव सात 8 वर्षों के निचले स्तर पर चल रहा है।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की जोरदार बारिश होने तथा कुछ राज्यों (खासकर पंजाब) में भयंकर बाढ़ आने से धान की फसल क्षतिग्रस्त हुई है।
वैसे धान का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 430.06 लाख हेक्टेयर से 8.45 लाख हेक्टेयर उछलकर इस बार 438.51 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है इसलिए कुछ क्षेत्रों में फसल को सीमित नुकसान होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर चावल का सकल उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर या उससे कुछ अधिक होने की उम्मीद है। यदि प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप नहीं रहता तो चावल का उत्पादन नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता था।
अमरीकी कृषि विभाग ने 2025-26 सीजन के दौरान ब्राजील एवं कोलम्बिया में चावल का उत्पादन बढ़ने तथा अमरीका और म्यांमार में उपयोग घटने का अनुमान लगाया है जिसने भारत और पाकिस्तान के चावल के निर्यात में कुछ कमी आने की संभावना जताई है जिससे वैश्विक बकाया स्टॉक में बढ़ोत्तरी हो सकती है। भारत में चावल का स्टॉक बढ़ने के आसार हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ की अधीनस्थ एजेंसी- खाद्य एवं कृषि संगठन (फाओ) के अनुसार अगस्त 2025 के दौरान चावल का वैश्विक बाजार भाव घटकर पिछले कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गया क्योंकि पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता के बीच इसकी मांग कमजोर रही।
फाओ ने चावल का वैश्विक उत्पादन 2024-25 सीजन के 54.99 करोड़ टन से 55 लाख टन बढ़कर 2025-26 के सीजन में 55.54 करोड़ टन पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है इसलिए यहां उत्पादन पर सबका ध्यान केन्द्रित है।
