छोटी इलायची में भारी सट्टेबाजी से व्यापारियों को काफी नुकसान

18-Apr-2025 05:14 PM

कोच्चि। देश के सबसे प्रमुख इलायची उत्पादक राज्य- केरल में इस सुगन्धित मसाले का उत्पादन 2024-25 के सीजन में कमजोर रहा और इसके नए माल की आवक भी देर से शुरू हुई।

दिलचस्प तथ्य यह है कि छोटी (हरी) इलायची के वायदा कारोबार पर केरल के उत्पादकों- व्यापारियों का नहीं बल्कि ग्वालियर (मध्य प्रदेश) के सिंडीकेट द्वारा कब्ज़ा कर लिए जाने की सूचना मिल रही है।

दैनिक भास्कर के अनुसार सट्टे की तर्ज पर ग्वालियर के सिंडीकेट द्वारा आगामी तिथियों के लिए होने वाले अनुबंध फ्यूचर कांट्रैक्ट का ऐसा गहरा जाल बनाया गया है जिसमें दिल्ली, मुम्बई एवं जयपुर जैसे प्रमुख खपत केन्द्रों के साथ-साथ स्वयं ग्वालियर के भी असंख्य कारोबारी बुरी तरह उलझ गए। 

समझा जाता है कि इस गहरी साजिश के तहत वास्तविक सौदा तो नहीं हुआ मगर डायरियों एवं पर्चियों में कारोबार सौदा के माध्यम से करोड़ों रुपए का लेन-देन दिखाया गया।

इसके बाद इलायची और डोडा (एक अन्य मसाला) की कीमतों को घटा दिया गया जिससे उन व्यापारियों को भारी नुकसान हो गया जो पहले ऊंचे दाम पर इसका अनुबंध कर चुके थे।

ग्वालियर के कारोबारी इस मायाजाल में बुरी तरह फंस गए हैं क्योंकि इलायची की कीमतों में गिरावट आने से खरीदारों ने सौदा उठाने और उसके मूल्य का भुगतान करने से इंकार कर दिया।

व्यापारियों के करोड़ो रुपए फंस गए हैं। सट्टेबाजों के दबाव बढ़ाने  से व्यापारियों में दहशत का माहौल है। समझा जाता है कि मामले में उसी तरह फंसे शिवपुरी के एक व्यापारी ने आत्महत्या कर ली और जयपुर तथा ग्वालियर के व्यापारियों ने पुलिस से सट्टेबाजी के खिलाफ  शिकायत की।

दरअसल असली लफड़ा इलायची की कीमत का है। उदाहरणस्वरूप यदि इलायची का बाजार भाव 3000 रुपए प्रति किलो है तो ग्वालियर में फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के तहत इसका दाम 2200 रुपए प्रति किलो रहता है।

एक बार सौदा होने के बाद खरीदार उससे मुकर नहीं सकता अन्यथा उसे 800 रुपए प्रति किलो के अंतर का भुगतान करना पड़ेगा और माल भी नहीं मिलेगा। सट्टेबाजों की इलायची घटिया किस्म की होती है।