DDGS बना मुर्गीपालन उद्योग, पशु आहार, खाद्य तेल उद्योग, चीनी उद्योग और ऑयलमील का सिरदर्द।
02-Dec-2024 10:15 AM
DDGS बना मुर्गीपालन उद्योग, पशु आहार, खाद्य तेल उद्योग, चीनी उद्योग और ऑयलमील का सिरदर्द।
★ भारत के मुर्गीपालन क्षेत्र में मक्का का 60% उपयोग होता है, लेकिन एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का की खपत 2022-23 में 10 लाख टन से बढ़कर 2023-24 में 70 लाख टन और 2024-25 में यह 130 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान।
★ डिमांड बढ़ने से मक्का की कीमतें 20% बढ़ी।
★ मक्का आधारित एथेनॉल की हिस्सेदारी 2021-22 में शून्य से बढ़कर 2023-24 में 40% हुई।
★ मक्का उत्पादन 2023-24 में घटकर 374 लाख टन रह गया जबकि मांग बढ़ी।
★ इसके परिणामस्वरूप, मक्का का आयात बढ़ा, और भारत मक्का का शुद्ध आयातक बन गया।
★ एथेनॉल उत्पादन के बढ़ते प्रभाव के कारण खाद्य तेल उद्योग पर भी दबाव बढ़ा, सस्ता DDGS मिलने से तेलमील की डिमांड और कीमतें घटी जिसका सीधा असर सोयाबीन और अन्य तिलहन की कीमतों पर पडा।
★ चीनी उद्योग भी हुआ प्रभावित। 2024-25 में चीनी उद्योग को केवल 837 करोड़ लीटर एथेनॉल का आवंटन किया गया, जबकि उनकी क्षमता 970 करोड़ लीटर की थी।
★ मक्का की बढ़ती मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण कीमतों पर दबाव रहेगा और आयात में वृद्धि हो सकती है।
★ भारत सरकार का लक्ष्य 2025 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण करना है, जिसके लिए मक्का की मांग और अधिक बढ़ने की संभावना है। इससे किसानों के लिए मक्का की खेती आकर्षक हो सकती है, लेकिन यह अन्य फसलों की खेती पर असर डाल सकता है।
