एथनॉल निर्माताओं को सरकारी चावल की बिक्री नियत कोटे से काफी कम

27-Aug-2025 11:55 AM

नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) में एथनॉल निर्माण के लिए डिस्टीलर्स को अब तक करीब 22 लाख टन बिक्री की गई है

जो जैव ईंधन उत्पादन के लिए नियत 52 लाख टन चावल के कोटे का 42 प्रतिशत है। मार्केटिंग सीजन समाप्त होने में अब केवल दो माह का समय बाकी है। इस अवधि में डिस्टीलर्स द्वारा शेष शेष 30 लाख टन चावल का उठाव किया जाना मुश्किल लगता है। 

एफसीआई के अधिकारियों का कहना है कि डिस्टीलर्स द्वारा प्रतिदिन औसतन करीब 12 हजार टन चावल का उठाव  किया जा रहा है और इस गति (दर) से अगले 60-65 दिनों में 30 लाख टन चावल की शेष मात्रा का उठाव संभव नहीं लगता  है।

डिस्टीलर्स को करीब 40 लाख टन चावल के लिए आवंटन पत्र प्राप्त हो चुका है जिसमें से 22 लाख टन का ही उठाव हुआ है। 31 अक्टूबर 2025 तक शेष 18 लाख टन चावल का उठाव और होना है। इसके लिए रोजाना औसतन 30-40 हजार टन का उठाव किया जाना आवश्यक है। 

उद्योग समीक्षकों के अनुरूप दरअसल संचालनीय समस्यायों के कारण एथनॉल उत्पादन के लिए चावल के उठाव की गति धीमी बनी हुई है।

एक तो सरकार द्वारा चावल के आवंटन की घोषणा काफी देर से की गई और दूसरे, डिस्टीलर्स को आवंटन पत्र भी विलम्ब से जारी किया गया। सरकार के पास चावल का विशाल अधिशेष भंडार मौजूद है। इसे घटाने की रणनीति बहुत पहले तैयार हो जानी चाहिए थी मगर इसकी घोषणा बहुत देर से की गई। 

शुरूआती चरण के दौरान सरकार ने एथनॉल निर्माण के लिए केवल 24 लाख टन चावल का कोटा निर्धारित किया था इसलिए डिस्टीलर्स द्वारा जल्दी-जल्दी इसकी खरीद का प्रयास किया गया।

बाद में सरकार ने इस कोटे को 28 लाख टन बढ़ाकर 52 लाख टन नियत कर दिया डिस्टीलर्स को जल्दबाजी दिखाने की जरूरत नहीं पड़ी। अब पेट्रोलियम कंपनियों ने एथनॉल की आपूर्ति का आर्डर देना बंद कर दिया है इसलिए डिस्टीलर्स की सक्रियता घट गई है।

1 जुलाई 2025 को केन्द्रीय पूल में 380 लाख टन चावल का प्रत्यक्ष स्टॉक था जबकि 140 लाख टन चावल के समतुल्य का स्टॉक भी राइस मिलर्स के पास मौजूद था। इस चावल की डिलीवरी होनी बाकी है।