एथनॉल से आय संवर्धन

12-Apr-2025 12:07 PM

भारत सरकार एथनॉल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए जोरदार प्रयास कर रही है क्योंकि इससे न केवल स्वच्छ एवं हरित ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी और जीवाश्म ईंधन (पेट्रोलियम) के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी बल्कि किसानों की आमदनी में भी भारी इजाफा करना संभव हो सकेगा।

देश में अमरीका सहित कुछ अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों से ईंधन के लिए एथनॉल के आयात पर अघोषित प्रतिबंध लगा हुआ है और इसके लिए स्पेशल परमिशन की जरूरत पड़ती है।

भारत में परम्परागत रूप से गन्ना से एथनॉल के उत्पादन पर जोर दिया जाता रहा है लेकिन अब अनाज से इसका उत्पादन बढ़ाने पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। इसमें चावल और मक्का मुख्य रूप से शामिल हैं।

देश में चावल का भरपूर उत्पादन होता है और इसकी बदौलत भारत दुनिया में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है।

एथनॉल निर्माण में अनाज आधारित उद्योग अब तक चावल का भारी उपयोग कर रहा था जबकि पिछले दो-तीन साल से वह मक्का का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। यह भारत के लिए भविष्य में अनेक दृष्टिकोण से लाभदायक साबित हो सकता है।

हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अनाज आधारित एथनॉल उद्योग के पास किसानों की आमदनी में 35,000 करोड़ रुपए तक की जबरदस्त बढ़ोत्तरी करने की क्षमता है।

भारत चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है लेकिन मक्का के उत्पादन में छठे-सातवें स्थान पर रहता है। एथनॉल उद्योग में इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज की मांग एवं खपत जितनी तेजी से बढ़ेगी उतनी ही तेजी से इसका घरेलू उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन भारतीय किसानों को प्राप्त हो सकता है क्योंकि मांग के साथ कीमतों में भी बढ़ोत्तरी होगी। 

मक्का एवं टुकड़ी चावल के बेहतर उपयोग से देश में एथनॉल का उत्पादन बढ़ने लगा है जिससे सरकार को पेट्रोल में इसके मिश्रण का लक्ष्य बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

रिपोर्ट में देश के अंदर एथनॉल निर्माण में अधिशेष अनाज का वार्षिक उपयोग बढ़कर 165 लाख टन तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया गया है जिससे किसानों की आमदनी में स्वाभाविक रूप से शानदार इजाफा हो जाएगा।

इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की समृद्धि बढ़ेगी। इसमें कोई  संदेह नहीं कि आने वाला समय एथनॉल का होगा।

अनेक देश बायोडीजल का उत्पादन बढ़ाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। भारत में कॉमोडिटी संवर्ग में सर्वाधिक खर्च पेट्रोलियम के आयात पर ही होता है जबकि सोना-चांदी दूसरे नम्बर पर तथा खाद्य तेल तीसरे स्थान पर है।

एथनॉल का उत्पादन बढ़ने पर पेट्रोल में इसका अधिक मिश्रण होगा और पेट्रोलियम के आयात में कमी आने पर विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।