फरवरी तक चावल की सरकारी खरीद 5 प्रतिशत बढ़कर 458 लाख टन से ऊपर पहुंची

04-Mar-2025 03:44 PM

नई दिल्ली। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान खरीफ मार्केटिंग सीजन के शुरूआती पांच महीनों में राष्ट्रीय स्तर पर चावल की सरकारी खरीद करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है।

अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान कुल 458.40 लाख टन चावल केन्द्रीय पूल के लिए खरीदा गया जो 2023-24 सीजन की समान अवधि की मात्रा 438.40 लाख टन से 20 लाख टन अधिक रहा।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के खरीफ सीजन में चावल का कुल घरेलू उत्पादन 1199.30 लाख टन होने का अनुमान लगाया है जिसका मतलब यह हुआ कि अभी तक कुल उत्पादन के 38 प्रतिशत भाग से अधिक चावल की सरकारी खरीद हो चुकी है जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त से भी ज्यादा है। व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि अब सरकार को चावल खरीदने की आवश्यकता नहीं है।  

नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बिहार में चावल (धान) की सरकारी खरीद 15 फरवरी को समाप्त हो गई। वहां चावल की कुल खरीद गत वर्ष के 20.60 लाख टन से बढ़कर इस बार 26.30 लाख टन पर पहुंच गई।

इसी तरह उत्तर प्रदेश में समीक्षाधीन अवधि के दौरान चावल की सरकारी खरीद 35.80 लाख टन से 8 प्रतिशत बढ़कर 38.60 लाख टन तथा मध्य प्रदेश में 28.20 लाख टन से एक लाख टन बढ़कर 29.20 लाख टन पर पहुंच गई। तीनों प्रांतों में धान की खरीद की प्रक्रिया बंद हो चुकी है।

लेकिन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र एवं उड़ीसा जैसे राज्यों में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की सरकारी खरीद चालू माह में समाप्त होने वाली है।

छत्तीसगढ़ केन्द्रीय पूल में चावल का योगदान देने वाला एक अग्रणी राज्य बन गया है। हैरत की बात है कि चावल की सरकारी खरीद पिछले साल के 74 लाख टन से घटकर इस बार 70 लाख टन पर सिमट गई जबकि वहां खरीद के लक्ष्य में बढ़ोत्तरी की गई थी।

वहां चावल की खरीद पर केन्द्र और राज्य सरकार के बीच मतभेद उत्पन्न हो गया था जिसे अब केन्द्र ने यह मानते हुए सुलझा लिया है कि पिछले सीजन के दौरान राज्य में 83 लाख टन चावल की खरीद हुई थी।

2024-25 के रबी खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 495.60 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।