गेहूं की कुल सरकारी खरीद 300 लाख टन से पीछे रह जाने की संभावना
27-May-2025 01:39 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय पूल में गेहूं का सर्वाधिक योगदान देने वाले तीन राज्यों- पंजाब, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की सरकारी खरीद की प्रक्रिया बंद हो चुकी है जबकि दो अन्य योगदानकर्ता प्रान्त-उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में खरीद की गति अत्यन्त धीमी है।
वहां अधिकांश सरकारी क्रय केन्द्रों पर वीरानी देखी जा रही है। किसानों के पास गेहूं का बिक्री योग्य स्टॉक तो है लेकिन वे सरकारी एजेंसियों को उसे बेचने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि थोक मंडी भाव पुनः सुधरने लगा है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 25 मई 2025 तक केन्द्रीय पूल के लिए किसानों से 297.80 लाख टन गेहूं खरीदा गया जो पिछले साल की समान अवधि की खरीद 262.70 लाख टन से 13.4 प्रतिशत या 35.10 लाख टन अधिक है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आगे गेहूं की सरकारी खरीद में सुधार आने की बहुत कम संभावना है जिसे देखते हुए लगता है कि 30 जून को औपचारिक तौर पर खरीद की प्रक्रिया समाप्त होने तक गेहूं की कुल सरकारी खरीद 300 लाख टन से कुछ पीछे रह जाएगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने इस वर्ष कुल 332.70 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर क्रमश: 175 रुपए तथा 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिए जाने से सरकार को इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद बढ़ाने में अच्छी सफलता हासिल हुई लेकिन पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में खरीद का प्रदर्शन उत्साहवर्धक नहीं रहा।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में 2024-25 के रबी सीजन में 1154.30 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना व्यक्त की थी। अब जल्दी ही मंत्रालय का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी होने वाला है
जिसमें गेहूं का उत्पादन आंकड़ा बढ़ाकर 1170 लाख टन नियत किए जाने की उम्मीद है। अमरीकी कृषि विभाग ने भी इतना ही उत्पादन होने का अनुमान लगाया है।
पंजाब में 124 लाख टन के नियत लक्ष्य की तुलना में 119.30 लाख टन तथा हरियाणा में 75 लाख टन के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 71.40 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई।
