गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से काफी पीछे रह जाने की संभावना
26-May-2025 11:21 AM
नई दिल्ली। अनौपचारिक तौर पर ही सही लेकिन अब सरकार ने भी इस वास्तविकता को स्वीकार कर लिया है कि एक बार फिर चालू वर्ष के दौरान केन्द्रीय पूल के लिए होने वाले गेहूं की खरीद 333 लाख टन के नियत लक्ष्य से काफी पीछे रह जाएगी।
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस बार 22 मई 2025 तक मंडियों में कुल करीब 392.93 लाख टन गेहूं पहुंचा जिसमें से 297.24 लाख टन सरकारी एजेंसियों द्वारा तथा शेष स्टॉक प्राइवेट क्षेत्र द्वारा खरीदा गया।
पंजाब, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद व्यावहारिक रूप से बंद हो चुकी है जबकि केन्द्रीय पूल में इन तीन राज्यों का सर्वाधिक योगदान रहता है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा 17.40 लाख टन तथा प्रांतीय एजेंसियों द्वारा 279.84 लाख टन गेहूं खरीदा गया। सरकार को उम्मीद है कि 30 जून 2025 को जब खरीद का सीजन समाप्त होगा तब तक गेहूं की कुल खरीद 300 लाख टन के करीब पहुंच जाएगी।
हालांकि मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में भी गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी मगर उत्तर प्रदेश और पंजाब में यह लक्ष्य से काफी पीछे रह गई जिससे अंतर काफी बढ़ गया है।
खाद्य मंत्रालय ने आरंभिक चरण में 312.70 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था जिसे बाद में 10-10 लाख टन के दो चरणों में बढ़ाकर 332.70 लाख टन नियत कर दिया। यह बढ़ोत्तरी केवल मध्य प्रदेश के लक्ष्य में की गई।
लक्ष्य से कम खरीद होने के बावजूद इस बार केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक काफी हद तक सुविधाजनक स्तर पर पहुंच गया जबकि सरकार के पास पहले से भी इसका अच्छा खासा स्टॉक मौजूद था। इससे कुल उपलब्धता में अच्छी बढ़ोत्तरी हो गई।
राहत की बात यह भी है कि इस बार फ्लोर मिलर्स, प्रोसेसर्स एवं अन्य प्राइवेट फर्मों द्वारा 90 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा गया है जिससे बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रह सकती है और सरकार को जल्दबाजी में खुले बाजार बिक्री योजना के तहत अपने स्टॉक से गेहूं उतारने के लिए विवश नहीं होना पड़ेगा।
