गेहूं के ऊंचे दाम में एफएमसीजी कंपनियों की कठिनाई बढ़ी

29-Nov-2024 05:07 PM

मुम्बई । घरेलू बाजार में गेहूं का भाव काफी ऊंचा होने से तेजी से उभरते उपभोक्ता उत्पादक (एफएमसीजी) क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों की कठिनाई काफी बढ़ गई है। ब्रेड से लेकर बिस्कुट तक का लागत खर्च बढ़ गया है और कंपनियों को इसका दाम बढ़ाना पड़ रहा है।

जिससे शहरी क्षेत्रों में इसकी मांग एवं खपत में गिरावट को रोकने के लिए इन फर्मों को भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि एफएमसीजी सेक्टर की कुल बिक्री में शहरी क्षेत्र की भागीदारी 60 प्रतिशत के करीब रहती है।

आगामी समय में इन कंपनियों की समस्या और भी गंभीर होने की समस्या थी लेकिन केन्द्र सरकार उसे बचाने के लिए सामने आ गई है।

सरकार ने भारतीय खाद्य निगम को अपने स्टॉक से खुले बाजार बिक्री योजना के तहत फ्लोर मिलर्स एवं प्रोसेसर्स को 25 लाख टन गेहूं अगले चार महीनों में उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है। इसका न्यूनतम आरक्षित मूल्य घरेलू बाजार में प्रचलित भाव से काफी नीचे है।   

गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के ऊंचे दाम के कारण अनेक कंपनियों का लाभांश जुलाई-सितम्बर 2024 की तिमाही में घट गया। इसका कारण यह था कि ये कंपनियां घरेलू बाजार में जारी तीव्र प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अपने खाद्य उत्पादों के दाम में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं कर सकी क्योंकि उससे उसकी बिक्री पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था। 

पिछले एक साल से गेहूं का भाव ऊंचा एवं तेज चल रहा है। अपने मार्जिन को उचित स्तर पर बरकरार रखने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकिंग साइज घटाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

अब सरकार के नीतिगत निर्णय से उसे काफी राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि खाद्य निगम का गेहूं काफी सस्ते दाम पर उपलब्ध होगा और तब कंपनियों को गेहूं उत्पादों से निर्मित खाद्य पदार्थों का लागत खर्च घटाने में सहायता मिलेगी।