गेहूं पर भंडारण सीमा लागू होने का कीमतों पर कोई खास असर नहीं
30-May-2025 02:18 PM
नई दिल्ली। हालांकि केन्द्र सरकार ने कथित रूप से घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इस बार 28 मई को ही गेहूं पर भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) लगा दी जिससे व्यापारी हैरान रह गए लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि इस निर्णय के बावजूद गेहूं के दाम पर कुछ खास असर नहीं पड़ा है।
दरअसल इस बार भंडारण सीमा के तहत गेहूं की जो उच्चतम मात्रा नियत की गई है वह लगभग सामान्य है और आमतौर पर व्यापारी तथा फ्लोर मिलर्स इस स्वीकृत मात्रा से अधिक गेहूं का स्टॉक नहीं रखते हैं।
गेहूं में अब भी मांग मजबूत बनी हुई है जिससे कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। दिल्ली में गेहूं का भाव स्टॉक लिमिट लगने से एक दिन पूर्व यानी 27 मई को 2755 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था
जो 28 मई को सुधरकर 2760 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचने के बाद 29 मई को फिसलकर पुनः 2755 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि स्टॉक लिमिट आर्डर से गेहूं का बाजार ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहा है।
जिन कारोबारियों एवं फ्लोर मिलर्स द्वारा स्टॉक लिमिट से कम मात्रा में गेहूं खरीदा गया है उसे अब इसकी खरीद कुछ और बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स के लिए यह अच्छा अवसर है क्योंकि उसे अपनी मिलिंग / प्रोसेसिंग क्षमता के 70 प्रतिशत के समतुल्य गेहूं का स्टॉक रखने की स्वीकृति दी गई है।
थोक व्यापारी भी एक समय में 3000 टन तक गेहूं का स्टॉक रख सकते है और इससे अधिक मात्रा का कारोबार अगले 15 दिनों में कर सकते हैं।
गेहूं की सरकारी खरीद लगभग बंद हो चुकी है लेकिन व्यापारिक खरीद जारी है। देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में गेहूं की आवक नियमित रूप से हो रही है और इसकी खरीद बिक्री की गति भी सामान्य बनी हुई है।
केन्द्र सरकार ने गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर 1175.10 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जो वास्तविक नहीं लगता है। अगले कुछ दिनों तक गेहूं के बाजार पर स्टॉक सीमा के प्रभाव का आंकलन करना आवश्यक होगा।
