गुजरात में मसाला फसलों के बिजाई क्षेत्र में जोरदार गिरावट
27-Nov-2024 03:11 PM
गांधी नगर । जीरा, धनिया, सौंफ, ईसबगोल एवं लहसुन जैसे मसालों के एक अग्रणी उत्पादक राज्य- गुजरात में चालू रबी सीजन के दौरान इन मसालों फसलों की खेती में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण काफी घटने के संकेत मिल रहे हैं।
पिछले साल जीरा का भाव उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के कारण किसानों ने इसका क्षेत्रफल काफी बढ़ा दिया था मगर अब इसका दाम घटकर सामान्य स्तर पर आ गया है। धनिया तथा सौंफ की कीमतों में भी तेजी-मजबूती का माहौल नहीं देखा जा रहा है।
राज्य कृषि विभाग के अनुसार गुजरात में जीरा का उत्पादन क्षेत्र इस वर्ष 25 नवम्बर तक केवल 58 हजार हेक्टेयर के करीब ही पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर से काफी कम तथा सामान्य औसत क्षेत्रफल 3,81,424 हेक्टेयर का 15.18 प्रतिशत है।
यद्यपि जीरे की बिजाई के लिए राज्य में मौसम की हालत काफी हद तक अनुकूल बनी हुई है मगर किसानों की दिलचस्पी में कमी आ गई है।
गत वर्ष वहां इसका रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। कम बिजाई के कारण उत्पादन घटने पर अगले साल जीरा का बाजार भाव ऊंचा एवं तेज रह सकता है।
जहां तक धनिया की बात है तो इसका तीन वर्षीय औसत क्षेत्रफल इस बार 1,58,440 हेक्टेयर आंका गया है जबकि 25 नवम्बर 2024 तक इसके 10.07 प्रतिशत भाग यानी 16 हजार हेक्टेयर में ही बिजाई संभव हो सकी जो गत वर्ष के उत्पादन क्षेत्र 57 हजार हेक्टेयर से भी काफी पीछे है।
इसी तरह सौंफ का रकबा पिछले साल के 69 हजार हेक्टेयर से लुढ़ककर इस बार 9 हजार हेक्टेयर पर अटक गया है जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 73,677 हेक्टेयर का महज 12.65 प्रतिशत है।
इसके साथ-साथ लहसुन का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 5705 हेक्टेयर से घटकर 2719 हेक्टेयर तथा ईसबगोल का क्षेत्रफल 4945 हेक्टेयर से गिरकर 1145 हेक्टेयर रह गया। सावा का रकबा भी 16 हजार हेक्टेयर से लुढ़ककर इस बार 2 हजार हेक्टेयर पर अटक गया है।
उपरोक्त मसाला फसलों की बिजाई दिसम्बर में भी जारी रहेगी लेकिन नवम्बर के दौरान क्षेत्रफल में इतनी जोरदार गिरावट आ गई है कि आगे इसकी भरपाई होना मुश्किल लगता है।
