गुजरात से दाल-दलहन का निर्यात बढ़कर 2.48 लाख टन पर पहुंचा
10-Feb-2025 11:01 AM
कांडला । दाल-दलहन, ग्वार, गम, डेयरी उत्पाद, मूंगफली एवं इसके तेल तथा जीरा आदि के निर्यात में गुजरात देश का अग्रणी राज्य बना हुआ है।
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दस महीनों में यानी अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 के दौरान गुजरात से दाल-दलहन का निर्यात पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब दोगुना बढ़कर 2,47,789 टन पर पहुंच गया।
डॉलर के मुकाबले रुपया की विनिमय दर बेहद अनुकूल रहने से निर्यातकों को शिपमेंट बढ़ाने में शानदार सफलता हासिल हो गई।
आज यानी 10 फरवरी 2025 को 'विश्व दलहन दिवस' मनाया जा रहा है। भारत दुनिया में दाल-दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक, खपतकर्ता एवं आयातक देश बना हुआ है।
भारत सरकार दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गुजरात इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
वहां अरहर तथा चना की उपज दर क्रमश: 1163 किलो प्रति हेक्टेयर तथा 1699 किलो प्रति हेक्टेयर है जो देश में सबसे ऊंची है। इसी तरह मूंग एवं उड़द की उत्पादकता दर के मामले में गुजरात देश में पांचवें नम्बर पर है।
वहां मूंग की उपज दर 810 किलो प्रति हेक्टेयर तथा उड़द की उपज दर 721 किलो प्रति हेक्टेयर रहती है। गुजरात में चना, मूंग, उड़द, मोठ, अरहर, चोला, बटर बीन्स एवं मटर आदि दलहनों का उत्पादन होता है।
पिछले पांच वर्षों के दौरान गुजरात में दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2018-19 के सीजन में वहां दलहनों का कुल उत्पादन क्षेत्र 6.62 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था जो 2022-23 तक आते-आते उछलकर 13.10 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इसी तरह राज्य में दलहनों का कुल उत्पादन भी इसी अवधि में 6.79 लाख टन से लगभग तीन गुणा बढ़कर 18.11 लाख टन पर पहुंच गया।
इसके तहत खासकर चना, मूंग, मोठ एवं उड़द के उत्पादन में शानदार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। चना का बिजाई क्षेत्र तो 1.73 लाख हेक्टेयर से उछलकर 7.64 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 2.35 लाख टन से बढ़कर 12.98 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
