ग्रीष्मकालीन बारिश से इलायची की फसल को फायदा
17-Apr-2025 12:10 PM
वंदनमेडू। दक्षिण भारत के दोनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- केरल और तमिलनाडु में नियमित रूप से मानसून पूर्व की (ग्रीष्मकालीन) वर्षा होने से छोटी इलायची की फसल को काफी फायदा हो रहा है और इसके उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद की जा रही है।
पिछले साल ऊंचे तापमान एवं शुष्क मौसम से फसल को काफी क्षति हुई थी और केरल के सबसे प्रमुख उत्पादक जिले इडुक्की में इलायची की औसत उपज दर में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई थी।
इस बार वहां अभी तक तीन-चार बार बारिश हो चुकी है और सूखे की आशंका लगभग समाप्त हो गई है। इसके फलस्वरूप इलायची का दाम भी नरम पड़कर 2500 रुपए प्रति किलो के आसपास आ गया है। जुलाई में नए माल की आवक शुरू होने की उम्मीद है।
खाड़ी क्षेत्र के देशों में आगामी बकरीद पर्व के लिए इलायची की अच्छी निर्यात मांग निकलने की संभावना है जिससे निर्यातकों को बेहतर आमदनी प्राप्त हो सकती है।
यदि उत्पादन शानदार हुआ तो उत्पादकों की कमाई में भी इजाफा होगा। इधर घरेलू प्रभाग में त्यौहारी सीजन के समाप्त होने के बाद इलायची की मांग कुछ सुस्त पड़ गई।
हालांकि मौसम की हालत अभी अनुकूल बनी हुई है लेकिन उत्पादक अपने स्टॉक को बेचने में काफी सावधानी बरत रहे हैं।
दरअसल पिछले साल भी मार्च-अप्रैल के दौरान वहां अच्छी वर्षा हुई थी मगर मई-जून में सूखा पड़ गया था जिससे फसल क्षतिग्रस्त हो गई।
निर्यातकों का कहना है कि वर्तमान समय में इलायची फसल की हालत काफी अच्छी है। गत वर्ष आपूर्ति की जटिलता से कीमत काफी तेज हो गई थी लेकिन इस बार बाजार में धीरे-धीरे मजबूती आ सकती है
क्योंकि इसका उपलब्धता की स्थिति बेहतर रहेगी। इस बार रमजान के दौरान इलायची की बिक्री उम्मीद से कम हुई इसलिए उत्पादकों के पास इसका स्टॉक बचा हुआ है।
