गत 15 वर्षों के दौरान काजू के निर्यात में 50 प्रतिशत की भारी गिरावट
30-May-2025 05:21 PM
मंगलोर। वियतनाम सहित अन्य आपूर्तिकर्ता देशों की सख्त प्रतिस्पर्धा, ऊंचे प्रोसेसिंग खर्च तथा कच्चे काजू के आयात पर बढ़ती निर्भरता जैसे कारकों की वजह से भारतीय प्रसंस्कृत काजू के निर्यात में भारी गिरावट आ गई है।
घरेलू प्रभाग में मांग एवं खपत बढ़ने से भी निर्यात पर असर पड़ा है। वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान भारत से काजू का निर्यात तेजी से उछलकर 1.31 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था लेकिन उसके बाद 15 वर्षों में इसका निर्यात घटकर लगभग आधा रह गया।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारतीय काजू के निर्यात से प्राप्त राजस्व घटकर 33.921 करोड़ डॉलर पर अटक गया जो पिछले सात वर्षों का सबसे निचला स्तर रहा। इससे पूर्व 2022-23 के वित्त वर्ष में देश से 59.581 टन काजू का निर्यात हुआ था जिसे पिछले दो दशकों में सबसे कम आंका गया।
नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के अनुसार काजू का निर्यात घटकर अब 45,000 टन के आसपास रह गया है जो हाल के वर्षों में सबसे कम है। एक अन्य समीक्षक के मुताबिक आमतौर पर भारत में अफ्रीकी देशों से विशाल मात्रा में कच्चे काजू का आयात किया जाता है।
वहां नई-नई प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित हो रही हैं जिससे निर्यात उद्देश्य के लिए इसका स्टॉक घट रहा है। भारत की तरह वियतनाम के प्रोसेसर्स भी वहां से भारी मात्रा में कच्चा काजू मंगाते हैं। इससे कई बार निर्यातक देशों में इसका दाम उछलकर गैर लाभप्रद स्तर पर पहुंच जाता है।
पिछले एक दशक के दौरान भारतीय प्रसंस्कृत काजू के निर्यात में जोरदार गिरावट आई है। 2004-05 में देश से करीब 1.27 लाख टन काजू का निर्यात हुआ था जो 2022-23 में घटकर 60 हजार टन के करीब सिमट गया।
लेकिन दूसरी ओर इसकी निर्यात आमदनी 1990-91 के 447.80 करोड़ रुपए से उछलकर 2019-20 में 3890.25 करोड़ रुपए पर पहुंच गई।
भारत दुनिया में काजू का एक अग्रणी उत्पादक एवं निर्यातक तथा सबसे बड़ा खपतकर्ता देश है। विशाल घरेलू बाजार की मांग को पूरा करने के बाद देश में काजू का निर्यात योग्य सीमित स्टॉक ही बचता है।
