घरेलू बाजार भाव को स्थिर रखने के लिए दलहनों के आयात पर अंकुश लगाने की जरूरत
05-Mar-2025 12:24 PM
मुम्बई। खरीफ और रबी सीजन में उत्पादित होने के विभिन्न दलहनों का थोक मंडी भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आ गया है इसलिए केन्द्र सरकार को वे सारे उपाय करने चाहिए जो भारतीय किसानों की सहायता के लिए आवश्यक है।
पिछले सप्ताह सरकार ने पीली मटर पर दोबारा आयात शुल्क लागू करने का निर्णय लिया। दिसम्बर 2023 में इसके शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई थी जो 28 फरवरी 2025 तक बरकरार रही।
उससे पूर्व सरकार ने अरहर (तुवर) के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को अगले एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक निर्धारित कर दिया था।
हालांकि दो सप्ताह पूर्व केन्द्रीय खाद्य मंत्री ने कहा था कि मसूर के आयात पर भी दोबारा सीमा शुल्क लगाने की सिफारिश की गई है लेकिन अभी तक इसके बारे में कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
मसूर, देसी चना तथा उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है। इन तीनों दलहनों के सम्बन्ध में सरकार को अगले कुछ दिनों में निर्णय लेना है।
भारत में दलहनों के शुल्क मुक्त आयात से दो तरह की चिंता उत्पन्न हो रही है। पहली बात यह है कि छह प्रमुख दलहनों का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है।
हालांकि उड़द एवं चना का भाव कुछ हद तक संतोषजनक है लेकिन फिर भी अपने शीर्ष स्तर की तुलना में बहुत नीचे रह गया है।
चना का दाम कुछ सप्ताह पूर्व उछलकर 8000 रुपए प्रति क्विंटल से भी ऊपर पहुंच गया था जो अब घटकर 6000 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे आ गया है। कुछ राज्यों में नए चने की आवक जोर पकड़ती जा रही है। इससे कीमतों पर दबाव और भी बढ़ने की आशंका है।
दूसरी चिंता दलहनों के विशाल आयात की है। ऑस्ट्रेलिया में चना के उत्पादन का नया मार्केटिंग सीजन अक्टूबर 2024 में आरंभ हुआ और तब से लेकर जनवरी 2025 तक भारत में वहां से 10 लाख टन से ज्यादा चना का आयात हो गया जो 2023-24 सीजन की सम्पूर्ण अवधि के दौरान महज 83 हजार टन ही रहा था।
इसी तरह द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत ने अक्टूबर-दिसम्बर 2024 की तिमाही में करीब 1.50 लाख टन मसूर का भी आयात किया।
इसी तरह कनाडा से अगस्त-दिसम्बर 2024 के दौरान 12.60 लाख टन पीली मटर तथा 6.43 लाख टन मसूर का आयात किया गया। वर्ष 2024 में पीली मटर का कुल आयात 30 लाख टन के करीब पहुंच गया।
