घरेलू बाजार भाव ऊंचा होने से चीनी के निर्यात में कठिनाई
07-Feb-2025 08:22 PM
मुम्बई । हालांकि दो सप्ताह पूर्व ही सरकार 10 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा घोषित कर चुकी है लेकिन अभी तक इसके शिपमेंट की प्रक्रिया जोर नहीं पकड़ सकी है और न ही विदेशी आयातक भारतीय चीनी की खरीद में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं क्योंकि इसका घरेलू बाजार भाव मिलर्स के लिए आकर्षक हो गया है और वे निर्यातकों से ऊंचा दाम मांग रहे हैं।
शुगर बायो एनर्जी फोरम के चेयरपर्सन का कहना है कि मिलों को चीनी का ऊंचा मूल्य प्राप्त होने की उम्मीद है। विभिन्न संघों-संगठनों द्वारा घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट आने का अनुमान लगाए जाने से चीनी का घरेलू बाजार तेज हो गया है। ऐसी स्थिति में मिलर्स नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के इच्छुक नहीं हैं।
दूसरी ओर चीनी का वैश्विक बाजार भाव इतना आकर्षक नहीं है कि वहां ऊंचे दाम पर इसकी बिक्री हो सके। हालांकि निर्यात उद्देश्य के लिए चीनी का ज्यादा कारोबार नहीं हो रहा है लेकिन अनेक मिलों ने 44,000 रुपए (505 डॉलर) प्रति टन की दर से अपनी चीनी का निर्यात लाइसेंस बेच दिया है।
एक विश्लेषक के मुताबिक अब तक निर्यात उद्देश्य के लिए लगभग 3 लाख टन चीनी का कारोबार होने की सूचना मिल रही है जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश की भागीदारी 2.0 लाख टन बताई जा रही है।
इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं अन्य उत्पादक राज्यों के मिलर्स द्वारा करीब 70 हजार टन चीनी की निर्यात बिक्री की गई है।
इधर घरेलू प्रभाग में चीनी का भाव उछलकर 41,000 रुपए प्रति टन पर पहुंच गया है इसलिए मिलर्स निर्यात उद्देश्य के लिए 45,000 रुपए प्रति टन का मूल्य प्राप्त करना चाहते हैं।
लंदन एक्सचेंज में पिछले दिनों मार्च अनुबंध के लिए सफेद चीनी का वायदा भाव 519.90 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया। जबकि न्यूयार्क एक्सचेंज में कच्ची चीनी (रॉ शुगर) का वायदा मूल्य 19.27 सेंट प्रति पौंड (37,345 रुपए प्रति टन) रहा।
भारतीय निर्यातक 530 डॉलर प्रति टन की दर से निर्यात अनुबंध करना चाहते है जो आयातकों के लिए महंगा है। भारत से बांग्ला देश, नेपाल, तंजानिया, श्रीलंका एवं दुबई को करीब 150 लाख टन चीनी का निर्यात होने का अनुमान है। आगे चीनी का बाजार दबने की संभावना कम ही है।
