घरेलू फसल को नुकसान होने पर बढ़ सकता है दलहन का आयात

28-Aug-2025 05:47 PM

मुम्बई। यद्यपि घटते-बढ़ते अंततः खरीफ कालीन दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 111.42 लाख हेक्टेयर से 1.34 लाख हेक्टेयर सुधरकर इस बार 112.77 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए इसके कुल उत्पादन में गिरावट की संभावना बन रही है।

लगभग सभी प्रमुख उत्पादक प्रांतों और खासकर राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात एवं मध्य प्रदेश में बाढ़ का गंभीर प्रकोप बना हुआ है।

बाढ़ की विभीषिका तो पंजाब, बिहार, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी देखी जा रही है मगर वहां दलहन फसलों की खेती अपेक्षाकृत कम क्षेत्रफल में होती है। 

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि प्रमुख दलहन फसलों में अब केवल अरहर (तुवर) का रकबा गत वर्ष से पीछे है जबकि उड़द, मूंग एवं मोठ का क्षेत्रफल पिछले साल से आगे निकल गया है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान तुवर का उत्पादन क्षेत्र 44.77 लाख हेक्टेयर से घटकर 43.98 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि दूसरी ओर उड़द का बिजाई क्षेत्र 20.31 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 21.71 लाख हेक्टेयर,

मूंग का क्षेत्रफल 33.50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 33.95 लाख हेक्टेयर तथा मोठ का रकबा 9.11 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 9.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

इसी तरह कुलथी का क्षेत्रफल 23 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 26 हजार हेक्टेयर तथा अन्य दलहनों का बिजाई क्षेत्र 3.50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.70 लाख हेक्टेयर हो गया। 

दलहन फसलों की बिजाई तो कुल मिलाकर सामान्य है लेकिन खेतों में इसकी हालत उत्साहवर्धक नहीं है। राजस्थान का आधा भाग बाढ़ से प्रभावित है। दलहन फसलों के खेतों में चार-पांच दिन से अधिक पानी का जमाव होने से उसके सड़ने-गलने का खतरा बढ़ जाता है।

विभिन्न उत्पादक राज्यों में बारिश का सिलसिला अभी बरकरार है जिससे दलहन फसलों की क्षति का दायरा और भी बढ़ने की आशंका है। ऐसी हालत में घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से इसका आयात बढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है।