घरेलू उत्पादन बढ़ने से पॉपकॉर्न मक्का के आयात में गिरावट
15-Jun-2026 12:02 PM
चेन्नई। एक स्थानीय कम्पनी के प्रमाणों से पिछले एक दशक के दौरान पॉपकॉर्न क्वालिटी के मक्का के घरेलू उत्पादन में जहां एक ओर ढाई गुणा (250 प्रतिशत) का जबरदस्त इजाफा हो गया वहां विदेशों से इसका आयात कुल घरेलू मांग एवं जरूरत के 70 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गया है।
वर्ष 2015 तक भारतीय पॉपकॉर्न मक्का का बाजार केवल कर्नाटक के उत्पादन तथा विदेशों से आयात पर निर्भर था। लेकिन उसके बाद घरेलू प्रभाग में इस विशेष क्वालिटी के मक्का का बिजाई क्षेत्र तथा उत्पादन बढ़ाने का नियमित प्रयास आरंभ हो गया।
पिछले एक दशक के दौरान भारत में पॉपकॉर्न मक्का का बाजार 50 हजार टन से बढ़कर 1.30 लाख टन वार्षिक पर पहुंच गया जबकि इसी अवधि में इसका घरेलू उत्पादन भी 15 हजार टन से उछलकर 85 हजार टन पर पहुंच गया।
पॉपकॉर्न मक्का का घरेलू उत्पादन बढ़ाने में चेन्नई की एक नामी-गिरामी कम्पनी का विशेष योगदान रहा है। वर्ष 2014 में स्थापित यह कम्पनी पॉपकॉर्न मूल्य श्रृंखला के सभी पहलुओं पर ध्यान देते हुए लगातार आगे बढ़ती रही।
इसमें हाइब्रीड सीड का उत्पादन और किसानों को उसकी खेती के लिए प्रोत्साहन, दाने का प्रसंस्करण, भंडारण तथा विपणन आदि पक्ष शामिल हैं। कम्पनी ने रिटेल उत्पादों के लिए अपना अलग ब्रांड भी तैयार किया।
बाद में इस कम्पनी ने अमरीका की एक फर्म के साथ एक रणनीतिक साझेदारी बनाई और पॉपकॉर्न मक्का की खेती के लिए विश्वस्तरीय विशेषज्ञता तथा दाने की सर्वोत्तम क्वालिटी हासिल कर ली।
कम्पनी के अनुसार शुरुआती दौर में इन बीजों का आयात किया गया और वर्ष 2016 में अक्टूबर-दिसम्बर के दौरान परीक्षण के तौर पर इसकी खेती शुरू की गई। उसके बाद जनवरी-मार्च 2018 में 840 एकड़ जमीन में उसका व्यावसायिक उत्पादन आरंभ किया गया।
