घरेलू उत्पादन एवं सरकार की नीति पर निर्भर करेगा दलहन का आयात
26-May-2025 07:29 PM
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में दलहनों का आयात तेजी से उछलकर 5 अरब डॉलर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया जो वित्त वर्ष 2023-24 के आयात 3.74 अरब डॉलर से काफी अधिक रहा। मात्रा के दृष्टिकोण से भी दलहनों का आयात नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
दरअसल भारत में तुवर, उड़द एवं मसूर का शुल्क मुक्त आयात तो पहले से जारी था जबकि सरकार ने दिसम्बर 2023 में पीली मटर तथा मई 2024 में देसी चना के आयात को भी शुल्क मुक्त कर दिया। देखते ही देखते चना का आयात शीर्ष स्तर पर पहुंच गया और पीली मटर का भी विशाल आयात हो गया।
अब देसी चना तथा मसूर के आयात पर 10-10 प्रतिशत का मूल सीमा शुल्क लगाया जा चुका है जबकि पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 मई को समाप्त हो रही है।
उद्योग व्यापार क्षेत्र सरकार से इस पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगाने का आग्रह कर रहा है। अगले एक-दो दिन में इस पर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। दिसम्बर 2023 से पूर्व पीली मटर पर न सिर्फ 50 प्रतिशत का भारी- भरकम आयात शुल्क लगा हुआ था बल्कि अनेक कठोर शर्ते भी लागू थी।
म्यांमार की एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- ओवरसीज एग्री ट्रेड एसोसिएशन (ओएटीए) के अध्यक्ष का कहना है कि कनाडा, म्यांमार एवं ब्राजील जैसे देशों में दलहनों का उत्पादन बढ़ा है जिससे निर्यात योग्य स्टॉक में वृद्धि हुई है।
भारत में कनाडा से मसूर एवं पीली मटर, म्यांमार से उड़द एवं तुवर तथा ब्राजील से उड़द का आयात होता है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया से देसी चना एवं मसूर रूस से पीली मटर एवं मसूर तथा अफ्रीकी देशों से तुवर एवं चना का आयात किया जाता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी वर्षा होने की उम्मीद है जिससे खरीफ कालीन दलहन फसलों और खासकर तुवर, उड़द एवं मूंग की बिजाई जल्दी ही जोर पकड़ने की संभावना है।
सरकार द्वारा शीघ्र ही इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा भी किए जाने के आसार हैं। यदि बिजाई की रफ्तार तेज रही, क्षेत्रफल में इजाफा हुआ, समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई और नियमित रूप से मानसून की बारिश होती तो दलहनों के घरेलू उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ जाएगी।
सरकारी गोदामों में चना तथा उड़द का स्टॉक कम है इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि पीली मटर के आयात के बारे में किस तरह का निर्णय लिया जाता है। दलहनों का घरेलू एवं वैश्विक बाजार भाव अपने शीर्ष स्तर की तुलना में घटकर काफी नीचे आ चुका है लेकिन सरकार को यह डर सता रहा है कि पीली मटर का आयात कम या बंद होने पर दलहनों और खासकर चना का दाम पुनः तेज हो सकता है।
