घरेलू उत्पादन घटने एवं आयात बढ़ने से दलहन बाजार का समीकरण बदला
09-Oct-2025 04:12 PM
मुम्बई। हालांकि केन्द्र सरकार बार-बार देश को दाल-दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर जोर दे रही है और कथित तौर पर इसके लिए भरसक प्रयास भी कर रही है मगर परिणाम सकारात्मक नहीं आ रहा है।
इसके बजाए दलहनों के बिजाई क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है और घरेलू उत्पादन कम होने से इसका आयात तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसके फलस्वरूप आत्मनिर्भरता का लक्ष्य काफी पीछे छूट गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में दलहन का आयात तेजी से उछलकर 73.60 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। पिछले पांच साल के दौरान भारत में दलहन के आयात पर 1.25 लाख करोड़ रुपए से अधिक की विशाल धनराशि खर्च हो चुकी है।
दूसरी ओर गत चार वर्षों के दौरान देश में दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में करीब 31 लाख हेक्टेयर की भारी गिरावट आ चुकी है। घटते क्षेत्रफल के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान के कारण दलहनों के उत्पादन में स्वाभाविक रूप से भारी गिरावट आ रही है।
केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत वर्ष 2030-31 तक दलहन फसलों का कुल बिजाई क्षेत्र 275 लाख हेक्टेयर के वर्तमान स्तर से 35 लाख हेक्टेयर बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसी तरह दलहनों का कुल उत्पादन 350 लाख टन तथा औसत उपज दर बढ़ाकर 1130 किलो प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
दलहन मिशन के अंतर्गत देश के 416 जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा और इसके कुल 11440 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है।
दलहनों के वार्षिक घरेलू उत्पादन आंकड़ों का अध्ययन करने से साफ संकेत मिलता है कि पिछले पांच साल से इसका आंकड़ा 2.50-2.60 लाख टन के बीच स्थिर बना हुआ है।
2020-21 के मार्केटिंग सीजन में 254.63 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ था जो 2021-22 में बढ़कर 273.02 लाख टन पर पहुंचने के बाद 2022-23 में घटकर 260.59 लाख टन तथा 2023-24 में गिरकर 242.46 लाख टन पर आ गया।
2024-25 के सीजन में 252.38 लाख टन दलहन का उत्पादन आंका गया। ये सभी सरकारी आंकड़े हैं जो प्राय: बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं।
