हरियाणा की नई सीएमआर पॉलिसी: मिलर्स नाराज़

20-Sep-2025 10:44 AM

नई कस्टम मिल्ड राइस पॉलिसी ने राइस मिलर्स को चिंता में डाला।

नई नीति में टूटे चावल की स्वीकार्य सीमा 25% से घटाकर 10% कर दी गई, उत्पादन खर्च बढ़ जाएगा और लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो जाएगा।

इसके अलावा, सरकार द्वारा तय की गई अतिरिक्त लागतें मिलिंग के लिए ₹2.23/क्विंटल, भंडारण के लिए ₹1.23/क्विंटल, पैकेजिंग के लिए ₹3.33/क्विंटल रखी गई जबकि वास्तविक लागत लगभग ₹25/क्विंटल है, जो बहुत कम है।

नई पॉलिसी के तहत मिलर्स को चावल की आपूर्ति तय समयसीमा में करनी होगी — दिसंबर तक 15%, जनवरी तक 25%, फरवरी तक 20%, मार्च तक 15%, मई तक 15% और 30 जून तक अंतिम 10%। मिलर्स का कहना है कि अगर समय पर धान की ढुलाई नहीं हुई तो इस डेडलाइन को पूरा करना मुश्किल होगा।

सरकार द्वारा अनाज मंडियों से एफसीआई गोदामों तक धान ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन सुविधा भी नहीं देने की बात कही।

इस साल राज्य में करीब 84 लाख मीट्रिक टन धान की आवक की संभावना है। इसमें से 54 लाख मीट्रिक टन की सरकारी खरीद और करीब 36 लाख मीट्रिक टन चावल केंद्रीय पूल में देने का लक्ष्य रखा गया।

मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि टूटे चावल की सीमा और लागत दरों पर पुनर्विचार किया जाए और ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था समय पर सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों और मिलर्स दोनों का नुकसान न हो।