इस बार गेहूं की सरकारी खरीद को नियत लक्ष्य तक पहुंचने का होगा पूरा प्रयास

03-Mar-2025 08:04 PM

नई दिल्ली। पिछले तीन वर्षों से केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से काफी कम हो रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 373 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जबकि वास्तविक खरीद 266.10 लाख टन पर अटक गई।

इसी तरह वर्ष 2023 में 341.50 लाख टन के नियत लक्ष्य की तुलना में 262 लाख टन तथा वर्ष 2022 में 444 लाख टन के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 187.90 लाख टन गेहूं खरीदा जा सका था। उससे पूर्व वर्ष 2021 के रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान गेहूं की सरकारी खरीद उछलकर 433.40 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। 

परिस्थितियों को भांपते हुए सरकार ने इस वर्ष 310 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के लिए  हर संभव प्रयास करने का प्लान बनाया है। केन्द्रीय पूल में गेहूं का योगदान देने वाले सभी शीर्ष राज्यों को यथा संभव अधिक से अधिक मात्रा में गेहूं खरीदने हेतु हर संभव उपाय करने के लिए कहा गया है।

आमतौर पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को पंजाब तथा हरियाणा में गेहूं की खरीद करने में ज्यादा कठिनाई नहीं होती है क्योंकि ऊंचे मंडी टैक्स के कारण व्यापारी तथा फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स वहां इसकी खरीद करने से हिचकते हैं। इसकी कमी को पूरा करने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे राज्यों को टारगेट किया जाता है। 

केन्द्र सरकार ने इन राज्यों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा है। लेकिन समस्या यह है कि लगभग तमाम उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में गेहूं का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर चल रहा है।

सरकार ने इसे घटाने के लिए खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत साप्ताहिक नीलामी में गेहूं की मात्रा बढ़ाकर 5 लाख टन निर्धारित कर दी है ताकि फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स को खुली मंडियों से कम से कम मात्रा में गेहूं की जरूरत पड़े और वहां इसका भाव कुछ नरम हो सके।

अगले महीने से गेहूं की नई फसल की जोरदार कटाई-तैयारी शुरू हो जाएगी और सरकारी तथा व्यापारिक खरीद की गति भी तेज होगी। गेहूं के नए माल की छिटपुट आवक मार्च में ही आरंभ होने की संभावना है।