जुलाई में ऑस्ट्रेलिया से भारत में 44 हजार टन से अधिक का आयात

19-Sep-2025 04:14 PM

ब्रिसबेन। मई और जून के दौरान सीमित मात्रा में हुए आयात के बाद जुलाई में अकस्मात भारत में ऑस्ट्रेलियाई मसूर का आयात काफी बढ़ गया क्योंकि इसका ऑफर मूल्य कमजोर रहा जबकि भारतीय बाजार में भाव कुछ तेज हो गया था। 

सरकारी संस्था- ऑस्ट्रेलियाई संख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) की रिपोर्ट के अनुसार भारत को मई-जुलाई 2025 की तिमाही के दौरान कुल 50,866 टन मसूर का निर्यात किया गया।

इसके तहत मई में सिर्फ 2635 टन तथा जून में महज 3766 टन मसूर का शिपमेंट हुआ था मगर जुलाई में इसका निर्यात तेजी से बढ़कर 44,465 टन पर पहुंच गया।

भारत की शानदार खरीद के कारण जून की तुलना में जुलाई के दौरान ऑस्ट्रेलिया से मसूर का निर्यात 50,032 टन से 79 प्रतिशत उछलकर 89,320 टन पर पहुंच गया। इससे पूर्व मई में वहां से 47,265 टन का शिपमेंट हुआ था। इस वर्ष मई-जुलाई 2025 की तिमाही में ऑस्ट्रेलिया से कुल 18,66,18 टन मसूर का निर्यात हुआ। 

समीक्षाधीन तिमाही के दौरान ऑस्ट्रेलिया से बांग्ला देश को 68,772 टन, भारत को 50,866 टन, श्रीलंका को 40,047 टन तथा पाकिस्तान को 20,761 टन मसूर का शिपमेंट किया गया।

इसके अलावा  नेपाल, बहरीन, मिस्र, मारीशस, न्यूजीलैंड तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ-साथ कुछ अन्य देशों को भी थोड़ी-बहुत मात्रा में इसका शिपमेंट किया गया। भारत में मसूर के आयात पर 10 प्रतिशत का मूल सीमा शुल्क लागू है। 

ऑस्ट्रेलिया में इस वर्ष मसूर का शानदार उत्पादन होने का अनुमान है जबकि कनाडा में भी उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिले हैं। इससे वैश्विक निर्यात बाजार में मसूर की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ेगा और दोनों देशों को एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।

मसूर का उत्पादन रूस में भी बेहतर होने की उम्मीद है जिससे वह वैश्विक निर्यात बाजार में आगे बढ़ने का प्रयास करेगा। वहां अमरीका की उपस्थिति भी रहेगी। तुर्की में उत्पादन कम हुआ लेकिन फिर भी आयात की गति धीमी है।

मसूर की नई फसल कनाडा में पिछले महीने से आ रही है जबकि ऑस्ट्रेलिया में अगले महीने से आएगी। भारत में मसूर की बिजाई-अक्टूबर में शुरू होने वाली है जबकि इसका घरेलू बाजार भाव एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना हुआ है।