जुलाई में देश से करीब 50 हजार टन अरंडी तेल का निर्यात

10-Sep-2025 09:44 PM

मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2025 में देश से केवल लगभग 50 हजार टन अरंडी तेल का निर्यात हुआ जो पिछले छह माह में सबसे कम रहा। इससे पूर्व जून में 56 हजार टन, मई में 69 हजार टन, अप्रैल में 63 हजार टन, मार्च में 65 हजार टन, फरवरी में 58 हजार टन तथा जनवरी 2025 में 53 हजार टन अरंडी तेल का निर्यात शिपमेंट किया गया था।

इस तरह चालू कैलेंडर वर्ष के शुरूआती साथ महीनों में यानी जनवरी-जुलाई 2025 के दौरान देश से कुल 4.15 लाख टन अरंडी तेल का निर्यात हुआ। जुलाई 2024 में 47 हजार टन से कुछ अधिक अरंडी तेल का शिपमेंट हुआ था जिसके मुकाबले जुलाई 2025 का प्रदर्शन कुछ बेहतर रहा। अगले कुछ महीनों तक निर्यात की गति धीमी रहने की संभावना है। 

एसोसिएशन के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि वर्ष 2024 की सम्पूर्ण अवधि (जनवरी-दिसम्बर) के दौरान भारत से कुल मिलाकर लगभग 6.50 लाख टन अरंडी तेल का शानदार निर्यात हुआ था जो वर्ष 2023 के शिपमेंट 6.29 लाख टन से 21 हजार टन अधिक था। उससे पूर्व वर्ष 2022 में 5.82 लाख टन से कुछ अधिक अरंडी तेल विदेश भेजा गया था।   

दरअसल जुलाई से ही अरंडी तेल के निर्यात का कमजोर सीजन आरंभ हो जाता है। फिलहाल देश में अरंडी की बिजाई चल रही है। इसके प्रमुख उत्पादक प्रांतों में गुजरात एवं राजस्थान शामिल है।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना सहित कुछ अन्य राज्यों में भी सीमित क्षेत्रफल में इसकी खेती होती है। दक्षिण भारत में अक्टूबर-नवम्बर में अरंडी की नई फसल तैयार होकर मंडियों में आ जाती है मगर वहां उत्पादन सीमित होने से माल की खपत जल्दी हो जाती है।

इसके बाद नवम्बर-दिसम्बर में राजस्थान तथा जनवरी-फरवरी में गुजरात में अरंडी का नया माल आता है। गुजरात में देश की 70 प्रतिशत से अधिक अरंडी का उत्पादन होता है। मई-जून तक वहां इसके नए माल की जोरदार आपूर्ति होती है

और इसके बाद आवक घटने लगती है। इससे क्रशर्स-प्रोसेसर्स को कम मात्रा में कच्चा माल मिलता है और अरंडी तेल का उत्पादन तथा निर्यात कमजोर पड़ने लगता है।