जलवायु परिवर्तन के कारण कई क्षेत्रों में कालीमिर्च की तुड़ाई-तैयारी में देर

14-Jan-2025 07:34 PM

इडुक्की । हालांकि सुदूर दक्षिणी प्रान्त- केरल के दक्षिणी भाग में स्थित पठानमथिट्टा, कोल्लम तथा कोट्टायम जैसे जिलों में कालीमिर्च की नई फसल की तुड़ाई-तैयारी धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है लेकिन अन्य उत्पादक क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण इसमें देर हो रही है।

इसके फलस्वरूप एक्सट्रैक्शन उद्योग को अपनी जरूरतों को पूरा करने  के लिए श्रीलंका से आयातित कालीमिर्च की खरीद जारी रखने के लिए विवश होना पड़ रहा है। 

इंडियन पीपर कम्युनिटी (आईपीसी) के वार्षिक सत्र (मीटिंग) में 2024 के दौरान कालीमिर्च की घरेलू खपत बढ़कर 1.31 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया गया।

जिसका प्रमुख कारण मसाला निर्माण उद्योग में उपयोग तेजी से बढ़ना है। लेकिन वर्ष 2025 का परिदृश्य ज्यादा उत्साहवर्धक नजर नहीं आ रहा है।

मौसम की प्रतिकूल स्थिति और वर्षा की अनिश्चित एवं अनियमित हालत से केरल तथा कर्नाटक में कालीमिर्च की फसल को काफी नुकसान होने की सूचना मिल रही है जिससे इसके उत्पादन में 25-30 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

यदि ऐसा हुआ तो देश में विदेशी कालीमिर्च के आयात का प्रवाह बढ़ सकता है और कीमतों में भी कुछ तेजी आ सकती है। 

आमतौर पर कालीमिर्च के सकल घरेलू उत्पादन में कर्नाटक का योगदान 55 प्रतिशत, केरल का 40 प्रतिशत तथा तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों का योगदान 5 प्रतिशत रहता है।

वर्ष 2024 के दौरान कर्नाटक के प्रमुख उत्पादक इलाकों में मौसम की हालत कालीमिर्च की फसल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं रही। केरल में भी स्थिति खराब ही देखी गई।