जून के अंत तक सोयाबीन की सरकारी बिक्री बंद रखने का सोपा का आग्रह

17-Apr-2025 11:28 AM

इंदौर। ऐसी चर्चा हो रही है कि केन्द्रीय स्तर की दो एजेंसियों- नैफेड तथा एनसीसीएफ द्वारा अपने स्टॉक में मौजूद सोयाबीन को घरेलू बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है जिसे देखते हुए उद्योग- व्यापार क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण सगंठन- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने सरकार से इस महत्वपूर्ण तिलहन की बिक्री कुछ समय तक स्थगित रखने का आग्रह किया है।

इससे पूर्व भी सोपा ने ऐसा ही आग्रह किया था जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था। सोपा का कहना है कि कम से कम आगामी बिजाई सीजन के अंत तक सरकारी सोयाबीन की बिक्री स्थगित रखी जानी चाहिए। 

हाल के दिनों में सोयाबीन के थोक मंडी भाव में कुछ सुधार आया है लेकिन सरकारी स्टॉक की बिक्री की चर्चा शुरू होने के बाद कीमतों में नरमी का माहौल बनने लगा है।

इससे किसानों को नुकसान होगा और खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन की खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण घट जाएगा। इससे सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन में गिरावट आने की आशंका रहेगी। 

केन्द्रीय कृषि सचिव को भेजे एक पत्र में सोपा के कार्यकारी निदेशक ने कहा है कि इस समय दोनों सरकारी एजेंसियों द्वारा खुले बाजार में अपने सोयाबीन के स्टॉक की बिक्री का प्रयास करना सभी सम्बद्ध पक्षों के लिए घातक साबित होगा और इस महत्वपूर्ण तिलहन की बिजाई में किसानों की दिलचस्पी भी घट जाएगी।

सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन की खरीद की गई है जबकि थोक मंडी भाव इससे काफी नीचे चल रहा है। ऐसे समय में सोयाबीन की बिक्री करने पर सरकार को भी काफी घाटा होगा।

सुनने में आ रहा है कि नैफेड और एनसीसीएफ टेंडर के माध्यम से खुले बाजार में सोयाबीन का स्टॉक उतारने की तैयारी कर रहा है। यदि सरकारी स्टॉक बाजार में आया तो किसानों को अपना उत्पाद बेचने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ेगा।

सोयाबीन की कीमतों में पुनः नरमी आने लगी है जिससे किसानों की चिंता और परेशानी बढ़ रही है। सोयाबीन की बिजाई का अभियान समाप्त होने के बाद ही सरकारी स्टॉक की बिक्री का प्रयास किया जाना चाहिए।

2024-25 के सम्पूर्ण खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान सोयाबीन का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे रहा। इसमें और गिरावट लाने का प्रयास नहीं होना चाहिए। 

उल्लेखनीय है कि सरकारी एजेंसियों के पास लगभग 20 लाख टन सोयाबीन का रिकॉर्ड स्टॉक मौजूद है और इसे जल्दी से जल्दी बेचने का प्लान बनाया जा रहा है।