ज्यादा आपूर्ति एवं सीमित मांग से लालमिर्च की कीमतों पर दबाव

17-Apr-2025 03:42 PM

गुंटूर। आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों की प्रमुख मंडियों में लालमिर्च की भारी आपूर्ति हो रही है मगर स्थानीय स्टॉकिस्टों एवं दिसावरी व्यापारियों के साथ-साथ निर्यातकों की लिवाली भी सीमित होने से इस महत्वपूर्ण मसाला के दाम पर दबाव पड़ने की आशंका है।

रमजान की समाप्ति के बाद खाड़ी क्षेत्र के देशों में लालमिर्च की मांग सुस्त पड़ गई। फिलहाल प्रमुख उत्पादक मंडियों में भाव सीमित उतार-चढ़ाव के साथ लगभग स्थिर बना हुआ है मगर सीमित कारोबार के कारण निकट भविष्य में इसकी कीमतों में ज्यादा तेजी आना मुश्किल लगता है। 

सबसे प्रमुख उत्पादक केन्द्र- आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में रोजाना औसतन 1.25-1.30 लाख बोरी लालमिर्च की भारी आवक हो रही है और तेलंगाना की मंडियों में भी अच्छी मात्रा में इसकी आपूर्ति दर्ज की जा रही है।

लेकिन इसके मुकाबले मांग कुछ कमजोर है। आपूर्ति की तुलना में मांग एवं उठाव का पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने से उत्पादकों को दाम घटाकर अपने माल की बिक्री करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। 

यद्यपि लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में 2023-24 सीजन के मुकाबले 2024-25 सीजन के दौरान गिरावट आई थी मगर मौसम की हालत अनुकूल रहने से उपज दर में वृद्धि होने के कारण कुल उत्पादन में ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है।

कीमतों का स्तर अपेक्षाकृत नीचे होने के बावजूद उत्पादक विभिन्न मंडियों में भारी मात्रा में अपना स्टॉक उतार रहे हैं क्योंकि उन्हें आगामी समय में इसके दाम में और नरमी आने की आशंका सता रही है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि राज्य सरकार ने एक निश्चित भाव पर किसानों से लालमिर्च खरीदने का निर्णय लिया था मगर उस समय बाजार में तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ था और किसानों ने खरीद प्रक्रिया को स्थगित रखने का आग्रह किया था।