कच्चे काजू का वैश्विक उत्पादन 2 प्रतिशत घटने का अनुमान

23-May-2025 06:17 PM

पाल्मा। इंटरनेशनल नट एंड ड्राइड फ्रूट कौंसिल की एक बैठक में 2023-24 सीजन के मुकाबले 2024 -25 के सीजन में कच्चे काजू का वैश्विक उत्पादन 2 प्रतिशत घटने का अनुमान लगाते हुए कहा गया है कि इसका उत्पादन उत्तरी गोलार्द्ध में 1 प्रतिशत कम होगा जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में 2 प्रतिशत बढ़ सकता है।

अफ्रीकी देशों में काजू की प्रोसेसिंग में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है जिससे वह प्रसंस्कृत काजू कर्नेल का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनता जा रहा है। पहले अफ्रीकी देशों से कच्चे काजू कर्नेल (आरसीएन) का विशाल निर्यात हो रहा था।

अमरीका द्वारा वियतनामी उत्पाद पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगाए जाने तथा चीन में स्रोत बंद किए जाने से काजू का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

इससे भारत को कितना फायदा होगा- यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक करार के लिए बातचीत चल रही है। भारत काजू के अग्रणी उत्पादक एवं निर्यातक देशों की सूची में शामिल है। 

अफ्रीकी देश कोट डी आइवरी 2025-26 सीजन के दौरान काजू के अग्रणी उत्पादक देश का दर्जा बरकरार रखने में सफल हो जाएगा क्योंकि वहां इसका उत्पादन 4 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

वस्तुतः पिछले 9 वर्षों के दौरान कोट डी आइवरी में कच्चे काजू के उत्पादन में लगभग दोगुनी बढ़ोत्तरी हो गई। वर्ष 2016 में वहां इसका उत्पादन 6.50 लाख टन दर्ज किया गया था जबकि 2025-26 के सीजन में यह उछलकर 12.50 लाख टन की ऊंचाई पर पहुंच जाने का अनुमान है।

वहां सरकार ने स्थानीय प्रोसेसिंग उद्योग को कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सीजन के आरंभ में ही कच्चे काजू के निर्यात पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। 

इसके विपरीत कम्बोडिया में काजू का उत्पादन 4 प्रतिशत घटने की संभावना है। वहां मार्च में काजू की आवक कम हुई लेकिन अप्रैल में बढ़कर गत वर्ष से आगे निकल गई।

वहां करीब 6.33 लाख हेक्टेयर में काजू की खेती होती है जबकि आगे इसका क्षेत्रफल और बढ़ने की संभावना है। कम्बोडिया से वियतनाम को विशाल मात्रा में कच्चे काजू का निर्यात किया जाता है। 

जहां तक भारत का सवाल है तो वर्ष 2024 में आरसीएन के वैश्विक उत्पादन में इसका योगदान 14 प्रतिशत रहा मगर प्रसंस्कृत काजू के निर्यात में इसकी भागीदारी केवल 5 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी।

ध्यान देने की बात है कि दुनिया में 31 प्रतिशत काजू की खपत अकेले भारत में होती है। काजू की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत को काजू का उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी।