कोएट की वार्षिक आम सभा में सरसों के उत्पादन एवं तेल की बेतरतीव पैकिंग पर गहरा मंथन
16-Sep-2025 12:36 PM
नई दिल्ली। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के शीर्ष संगठन- सेन्ट्रल आर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कोएट, COOIT) की वार्षिक आम बैठक में 2024-25 सीजन के दौरान देश में सरसों के उत्पादन अनुमान के बारे में उठाए जा रहे सवाल तथा विभिन्न पैक साइज में सरसों तेल (अन्य खाद्य तेल भी) की पैकिंग से हो रही असुविधा पर गहन एवं विस्तृत विचार विमर्श किया गया।
चालू वर्ष के दौरान सरसों तेल की कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी को देखते हुए यह चर्चा होने लगी कि रबी तिलहन सेमिनार में कोएट ने 111 लाख टन सरसों के उत्पादन का जो अनुमान लगाया था वह सही नहीं है।
चूंकि जयपुर के एक प्रतिष्ठित कारोबारी और मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर- अनिल चतर कोएट की फसल समिति के कन्वीनर हैं इसलिए फसल उत्पादन का गलत आंकलन करने का आरोप उन पर ही लगाया गया।
नकली whatsapp पर ऐसी भ्रामक सूचनाएं आने लगी कि 2024-25 के रबी सीजन में 90 लाख टन से अधिक सरसों का उत्पादन नहीं हुआ और इसलिए सरसों सीड तथा सरसों तेल का भाव तेजी से उछलकर शीर्ष स्तर पर पहुंचने लगा।
ऐसे मनगढ़ंत आंकड़ों से सरसों के कारोबार में गलतफहमी या दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई और निर्दोष होते हुए भी अनिल चतर को विशेष रूप से टारगेट किया गया। अनिल चतर इस झूठे और मनगढ़ंत आरोप से इतने आहत हुए कि उन्होंने प्रत्यके माह देश में सरसों की आवक, क्रशिंग एवं अधिशेष स्टॉक से सम्बन्धित अपनी रिपोर्ट देनी बंद कर दी।
गत 13 सितम्बर को दिल्ली में कोएट की कार्यकारिणी समिति की मीटिंग में यह मामला उठाया गया। एक स्वर से इस हकीकत को स्वीकार किया गया कि अनिल चतर की मासिक रिपोर्ट बंद होने से क्रशर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों को भारी कठिनाई हो रही है और सरसों क्षेत्र में असमंजस पैदा हो गया है।
कोएट की मीटिंग में राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली के 50 सदस्य उपस्थित थे और सबने सरसों कारोबार में अनिल चतर के विशेष योगदान की सराहना करते हुए उनसे अपनी मासिक रिपोर्ट जारी रखने का आग्रह किया। सबका मानना था कि अनिल चतर की मासिक रिपोर्ट सरसों बाजार के लिए दर्पण का काम करती है। तमाम सदस्यों के जोरदर आग्रह को देखते हुए अनिल चतर अंततः अपनी मासिक रिपोर्ट जारी रखने पर सहमत हो गए।
सरसों के उद्यमी एवं व्यापारी इस बात से नाराज है कि सरसों तेल की पैकिंग का समान साइज रखने का नियम लागू करने में सरकार देर कर रही है।
समान पैकिंग का कानून लागू करने में हो रहे विलम्ब से सरसों तेल की छोटी-छोटी इकाइयों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कोएट के सभी सदस्यों द्वारा सरकार से वर्ष 2022 से पूर्व प्रचलित पैकिंग साइज का नियम यथाशीघ्र लागू करने की जोरदार मांग की गई।
