कम बिजाई एवं अधिशेष वर्षा के बावजूद कपास का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

18-Sep-2025 11:58 AM

नई दिल्ली। यद्यपि पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कपास के बिजाई क्षेत्र में करीब 2.85 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है और कुछ राज्यों में फसल को अधिशेष वर्षा एवं बाढ़ से नुकसान भी होने की खबर है जिससे आमतौर पर इस बार रूई का उत्पादन घटने की सभावना व्यक्त की जा रही है

लेकिन कुछ समीक्षकों को इसका उत्पादन गत वर्ष से बेहतर होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि देश के दो सबसे प्रमुख रूई उत्पादक राज्य- गुजरात एवं महाराष्ट्र में कपास के बिजाई क्षेत्र में सर्वाधिक कमी आई है। इसके साथ-साथ अगस्त माह की जोरदार बारिश से कुछ राज्यों में फसल को क्षति भी हुई है। 

एक विश्लेषक का कहना है कि प्रमुख उत्पादक इलाकों में इस वर्ष सही समय पर दूर-दूर तक अच्छी वर्षा हुई और फसल पर कीड़ों-रोगों का प्रकोप भी बहुत कम देखा गया।

प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से फसल को कुछ नुकसान हुआ है मगर बची हुई फसलों की हालत बहुत अच्छी है और उसकी उपज दर एवं क्वालिटी में सुधार आने के प्रबल आसार हैं।

इस वर्ष किसानों ने कपास के बजाए गुजरात में मूंगफली तथा महाराष्ट्र में मक्का की खेती पर विशेष जोर दिया। इसके फलस्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर कपास का सकल बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 112.48 लाख हेक्टेयर से 2.53 प्रतिशत घट कर इस बार 109.64 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। कपास की बिजाई समाप्त हो चुकी है। 

कपास का क्षेत्रफल गुजरात में 23.66 लाख हेक्टेयर से 12 प्रतिशत घटकर 20.82 लाख हेक्टेयर तथा महाराष्ट्र में 40.81 लाख हेक्टेयर से गिरकर 38.44 लाख हेक्टेयर रह गया। लेकिन दक्षिण राज्यों में इसके रकबे में बढ़ोत्तरी हुई है।

इसके तहत गत वर्ष के मुकाबले इस बार कपास का उत्पादन क्षेत्र तेलंगाना में 18.11 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 18.51 लाख हेक्टेयर तथा कर्नाटक में 7.79 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 8.08 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया

मगर आंध्र प्रदेश में 4.13 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.77 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। वहां फसल की हालत उत्साहवर्धक है और इसके आधार पर समीक्षकों का मानना है कि रूई के उत्पादन में उत्तरी राज्यों में आने वाली कमी को दक्षिण भारत पूरा कर सकता है।