कम बिजाई एवं फसल को हुए नुकसान से कपास का उत्पादन घटने की संभावना
17-Sep-2025 08:45 PM
मुम्बई। पिछले साल की तुलना में इस बार गुजरात एवं महाराष्ट्र जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में कपास की खेती में किसानों द्वारा कम दिलचस्पी दिखाई गई। महाराष्ट्र में कपास के बजाए मक्का तथा गुजरात में मूंगफली की खेती को विशेष प्राथमिकता दी गई।
हालांकि कुछ राज्यों में कपास का रकबा बढ़ा है लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर इसका कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 112.48 लाख हेक्टेयर से 2.84 लाख हेक्टेयर घटकर इस वर्ष 12 सितम्बर तक 109.64 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। कपास की बिजाई का अभियान लगभग समाप्त हो चुका है।
पिछले साल के मुकाबले मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान कपास का उत्पादन क्षेत्र गुजरात में 23.67 लाख हेक्टेयर से 2.84 लाख हेक्टेयर लुढ़ककर इस बार 20.83 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि महाराष्ट्र में इसका बिजाई क्षेत्र 40.82 लाख हेक्टेयर से 2.37 लाख हेक्टेयर घटकर इस बार 38.45 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
दिलचस्पी तथ्य यह है कि गुजरात के मुकाबले महाराष्ट्र में लगभग दोगुने अधिक क्षेत्रफल में कपास की बिजाई होती है लेकिन फिर भी इस महत्वपूर्ण रेशेदार औद्योगिक फसल गुजरात ही महाराष्ट्र से आगे रहता है क्योंकि वहां रूई की औसत उपज दर अपेक्षाकृत काफी ऊंची रहती है। इन तीनों राज्यों में कपास की फसल को बाढ़ वर्षा जैसी प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होने की सूचना भी मिल रही है।
कपास की फसल को तीसरे सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- तेलंगाना में भी क्षति हुई है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में भारी वर्षा एवं खेतों में जल-जमाव की वजह से फसल क्षतिग्रस्त हुई है।
कुल मिलाकर इस बार कपास के घरेलू उत्पादन में पिछले दो वर्षों की भांति गिरावट आने की आशंका है। सरकार पहले ही रूई के आयात को 31 दिसम्बर 2025 तक के लिए शुल्क मुक्त कर चुकी है जिससे देश में इसका विशाल आयात होने की संभावना है।
इधर भारतीय किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रूई की खरीद के लिए सरकारी एजेंसी भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा जोरदार तैयारी की जा रही है। अगले महीने से नई रूई की जोरदार आवक शुरू हो सकती है।
