कम उत्पादन एवं कमजोर बाजार भाव से तेलंगाना के कपास उत्पादक नाखुश

29-Nov-2024 12:05 PM

हैदराबाद । गुजरात और महाराष्ट्र के बाद देश के तीसरे सबसे प्रमुख रूई उत्पादक राज्य- तेलंगाना के कपास उत्पादक काफी चिंतित और परेशान हैं क्योंकि एक तो प्राकृतिक आपदाओं एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से फसल को हुए नुकसान के कारण कपास के उत्पादन में कमी आ गई है और दूसरे, रूई का बाजार भाव भी कमजोर चल रहा है जिससे किसानों को आकर्षक वापसी हासिल नहीं हो रही है।

नई फसल की तुड़ाई-तैयारी के समय हुई बेमौसमी बारिश के कारण रूई में नमी का अंश बढ़ गया है जिससे इसके दाम में गिरावट आ गई है। इसके अलावा कपास की औसत उपज दर भी घट गई है।

आमतौर पर राज्य में औसत उपज दर 8-10 क्विंटल प्रति एकड़ रहती है जो इस बार कई क्षेत्रों में गिरावट महज 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ रह गई है।

कपास की फसल पर इस बार गुलाबी सूंडी (पिंक बॉलवर्म) कीट का आघात बढ़ गया। महबूबाबाद जिले के कुछ भागों में तो दो एकड़ भूमि में महज 4-5 क्विंटल रूई का उत्पादन देखा जा रहा है। 

केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा चालू मार्केटिंग सीजन में अभी तक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लगभग 43 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई है।

इसका औसत मूल्य 7400 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रहा। कपास में नमी का अंश बहुत ज्यादा होने से शुरूआती चरण के दौरान इसकी सरकारी खरीद की गति काफी धीमी रही लेकिन दीपावली के बाद इसकी रफ्तार बढ़ने लगी।

किसान अब सीसीआई को बेचने के लिए सरकारी क्रय केन्द्रों पर भारी मात्रा में अपनी रूई लेकर पहुंच रहे हैं। कई क्रय केन्द्र कॉटन जिनिंग मिलों के कैम्पस में बनाए गए हैं जहां मिलर्स इसके वजन में प्रति क्विंटल पर 4-5 किलो की कटौती का देते हैं।

उस कपास की क्वालिटी को क्षतिग्रस्त या खराब बता दिया जाता है। इससे किसानों को उचित प्राप्त नहीं हो रही है। राज्य में रूई की दूसरे चरण की तुड़ाई-तैयारी के लिए पर्याप्त संख्या में मजदूर नहीं मिल रहे हैं।

विपक्षी दलों का कहना है कि खम्माम में किसानों को केवल 6500 रुपए प्रति क्विंटल की वापसी हो रही है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य 7521 रुपए प्रति क्विंटल से काफी कम है।