कमजोर मांग एवं अधिक स्टॉक से मखाना का भाव नरम लेकिन आगे तेज होने की संभावना

20-Dec-2024 08:24 PM

नई दिल्ली । जाड़े के मौसम शुरू होने, शादी-विवाह एवं अन्य मांगलिक उत्सवों का आयोजन एक माह के लिए बंद हो जाने तथा छोटे-छोटे उत्पादकों तथा व्यापारियों के माल की बिक्री जारी रहने से मखाने के दाम पर कुछ दबाव देखा जा रहा है।

समझा जाता है कि चालू वर्ष के अंत तक बाजार में कुल मिलाकर नरमी का ही रुख बना रहेगा लेकिन अगले साल इसमें तेजी की गुंजाईश बन सकती है। तब तक छोटे व्यापारियों का माल काफी हद तक बिक चुका होगा। 

सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- बिहार के गुलाब बाग, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल समस्तीपुर, पूर्णिया, कटिहार तथा पश्चिम बांग्ला के कुछ क्षेत्रों में जुलाई-अगस्त से ही नए मखाने की आवक हो रही है।

पिछले सीजन में मखाना का भाव ऊंचा एवं तेज रहा था इसलिए इस बार छोटे-छोटे व्यापारियों द्वारा ऊंचे दाम पर किसानों से माल खरीदकर अच्छा स्टॉक बनाने का प्रयास किया।

जब तक खपत का सीजन चलता रहा तब तक मखाने का दाम भी ऊंचे स्तर पर बरकरार रहा लेकिन मांग कमजोर पड़ते ही दाम नरम होने लगा।

मकर संक्रांति (14 जनवरी) तक शादियों का सीजन बंद रहेगा। इसलिए मखाने की अतिरिक्त मांग एवं खपत की संभावना तब तक बहुत कम रहेगी।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में औसत क्वालिटी के मखाने का भाव 1050/1150 रुपए प्रति किलो तथा उच्च क्वालिटी वाले माल का दाम 1500/1550 रुपए प्रति किलो बताया जा रहा है। हल्की क्वालिटी का मूल्य 850/900 रुपए प्रति किलो है। 

उत्पादक मंडियों में माल का सीमित स्टॉक बचा हुआ है जबकि नया माल आने में अभी छह-सात महीने की देर है। इस बीच मांग के अनुरूप दाम में तेजी-मंडी बनी रहेगी।