कमजोर मानसून से खरीफ कालीन दलहन का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
22-Apr-2026 11:59 AM
नई दिल्ली। वैश्विक दलहन इकोसिस्टम का ऐसी सेंटर माना जाने वाला भारत फिलहाल संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। 2025-26 के खरीफ एवं रबी सीजन में कुछ उतार-चढ़ाव के साथ दलहन फसलों का उत्पादन लगभग सामान्य रहा और पिछले बकाया स्टॉक की वजह से विदेशों से इसके आयात की आवश्यकता भी कम पड़ी।
लेकिन अब 2026-27 के खरीफ सीजन में दलहन उत्पादकों के लिए अग्नि परीक्षा शुरू होने वाली है। इस पर गहरी नजर रखने की आवश्यकता है।
भारत दुनिया में दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपयोगकर्ता, प्रोसेसर्स एवं आयातक देश हैं। यहां खरीफ सीजन में अरहर (तुवर), उड़द एवं मूंग तथा रबी सीजन में चना, मसूर एवं मटर का भारी उत्पादन होता है। इसके अलावा कुछ अन्य दलहनों की भी सीमित पैदावार होती है। चना, तुवर, उड़द एवं मूंग के उत्पादन में भारत सबसे आगे है।
दुनिया के अनेक देश मुख्यतः भारतीय बाजार पर नजर रखते हुए दलहनों का उत्पादन करते हैं क्योंकि भारत बड़े पैमाने पर तुवर, उड़द, मसूर, मटर (पीली) एवं चना (देसी) का आयात करता है।
यदि भारत में आयात थम जाए तो कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों में दलहनों का उत्पादन काफी हद तक प्रभावित हो सकता है और इसके वैश्विक बाजार मूल्य में भारी गिरावट आ सकती है।
भारत में दलहनों का कुल उत्पादन 2021-22 में 273 लाख टन पर पहुंचा था जो 2025-26 के सीजन में घटकर 260 लाख टन के आसपास सिमट जाने की संभावना है। दलहनों की कुल घरेलू पैदावार में चना तथा तुवर की संयुक्त भागीदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रहती है।
इस वर्ष अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने की संभावना है जिससे जून-सितम्बर में खरीफ सीजन के दौरान वर्षा की स्थिति अनिश्चित एवं अनियमित रह सकती है। इससे तुवर, उड़द एवं मूंग की बिजाई तथा प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
