कनाडाई मसूर निर्यातकों को ऑस्ट्रेलिया से अच्छी चुनौती मिलने की संभावना
18-Jul-2025 07:23 PM
ब्रिसबेन। भारतीय आयातकों की सुस्ती एवं आपूर्तिकर्ता देशों में हाजिर स्टॉक की कमी के कारण मसूर का वैश्विक कारोबार फिलहाल सुस्त देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया से कंटेनरों में मसूर के निर्यात की गति धीमी पड़ गई है क्योंकि अधिकांश परम्परागत आयातकों का ध्यान उत्तरी गोलार्द्ध के प्रमुख उत्पादक देशों और खासकर कनाडा, रूस तथा अमरीका में जल्दी ही आने वाली नई फसल के प्रति चिंता बनी हुई है जिससे निर्यातक सावधान हो गए हैं।
निर्यातकों ने मसूर के निर्यात की गति धीमी कर दी है क्योंकि उन्हें आगामी दिनों में इसका दाम सुधरने का भरोसा है। कनाडा में मसूर फसल की अधिकांश कटाई-तैयारी अगस्त-सितम्बर में हो सकती है
और उसके बाद अक्टूबर-नवम्बर में ऑस्ट्रेलियाई फसल कटने लगती है। आयातकों को आगामी महीनों के दौरान मसूर का भाव कुछ नरम पड़ने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया में मसूर के दाम में कुछ उतार- चढ़ाव देखा जा रहा है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक दिसावरी पैकर्स को डिलीवरी के लिए निप्पर किस्म की मसूर का भाव 770 डॉलर (ऑस्ट्रेलियन) प्रति टन के करीब चल रहा है जबकि श्रीलंका को निर्यात के लिए जम्बो मसूर का मूल्य 820 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है।
साउथ ऑस्ट्रेलिया प्रान्त में इस बार मसूर की रिकॉर्ड बिजाई हुई है और यदि आगामी महीनों में मौसम एवं वर्षा की हालत सामान्य रही तथा कीड़ों-रोगों का प्रकोप नहीं रहा तो वहां इसका उत्पादन शीर्ष स्तर पर पहुंच सकता है।
फिलहाल वहां नियमित रूप से अच्छी बारिश हो रही है जिससे सूखे का संकट कम हो गया है। वहां पॉर्क तथा आयर प्रायद्वीप में उत्पादकों ने अपनी आगामी फसल की मसूर की बिक्री के लिए 740-750 डॉलर प्रति टन की दर से अग्रिम अनुबंध करना शुरू कर दिया है।
समझा जाता है कि ऑस्ट्रेलिया में पिछले साल की तुलना में इस बार मसूर का बेहतर उत्पादन होने वाला है जिससे निर्यात योग्य स्टॉक में इजाफा होगा और कीमतों में कुछ नरमी आएगी।
इससे कनाडाई निर्यातकों के लिए भारत जैसे विशाल बाजार में चुनौती एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। भारत में मसूर के आयात पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है मगर ऑस्ट्रेलिया से इसके 1.50 लाख टन तक के आयात पर 5 प्रतिशत का ही सीमा शुल्क लगेगा।
