क्रूड एवं रिफाइंड खाद्य तेलों के बीच शुल्कांतर बढ़ाने की जरूरत
22-May-2025 07:56 PM
मुम्बई। भारत में रिफाइंड खाद्य तेल के संवर्ग में मुख्यत: आरबीडी पामोलीन का आयात होता है जबकि क्रूड के संवर्ग में पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल मंगाया जाता है।
क्रूड खाद्य तेल एवं रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात पर जो सीमा शुल्क लगाया गया है उसमें केवल 7.5 प्रतिशत का अंतर है जबकि एक अग्रणी उद्योग संस्था- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने सरकार से इस अंतर को कम से कम दोगुना बढ़ाकर 15 प्रतिशत निर्धारित करने का आग्रह किया है।
ध्यान देने की बात है कि इंडोनेशिया सरकार क्रूड पाम तेल के बजाए रिफाइंड पाम तेल / आरबीडी पामोलीन के निर्यात को ज्यादा प्रोत्साहित कर रही है और उस पर निर्यात शुल्क एवं निर्यात लेवी का स्तर भी नीचे रख रही है ताकि वह प्रतिस्पर्धी मूल्य स्तर पर उपलब्ध हो सके।
एसोसिएशन का कहना है कि आरबीडी पामोलीन का विशाल आयात भारतीय रिफाइनर्स के लिए सिरदर्द बना हुआ है और उसकी रिफाइनिंग क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है।
इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। यदि आरबीडी पामोलीन पर क्रूड पाम तेल के मुकाबले 15 प्रतिशत ऊंचा शुल्क लगे तो स्वदेशी रिफाइनर्स को आयातित तेल के मुकाबले प्रतिस्पर्धा का समान धरातल प्राप्त हो सकता है।
इस मामले में केन्द्रीय खाद्य मंत्री एवं खाद्य सचिव के साथ एसोसिएशन की बातचीत हो रही है और शुल्कांतर में वृद्धि के प्रस्ताव पर सरकार गम्भीरतापूर्वक विचार कर रही है। स्वदेशी रिफाइनिंग उद्योग के लिए यह आवश्यक है।
एसोसिएशन के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में जो निर्णय दिया है वह उद्योग व्यापार क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
उच्चतम-न्यायालय ने कहा है कि सोयाबीन से सोया तेल प्राप्त करने की प्रक्रिया एक निर्माण विधि (मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस) है। सोयाबीन तेल कोई कृषि उत्पाद (जिंस) नहीं है।
इस तरह सर्वोच्च-न्यायालय का यह निर्णय खाद्य तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के उन सदस्यों के लिए लाभदायक साबित होगा जो इस तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
एसोसिएशन ने केन्द्र सरकार से डि ऑयल्ड राइस ब्रान के निर्यात पर लागू प्रतिबंध को जल्दी से जल्दी हटाने का आग्रह भी किया है क्योंकि इस पाबन्दी से खासकर पश्चिम बंगाल एवं उड़ीसा जैसे राज्यों के मिलर्स-प्रोसेसर्स को भारी नुकसान हो रहा है।
