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05-Nov-2026 06:10 PM
मुम्बई। एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने कपास का घरेलू उत्पादन 2025-26 सीजन के 325.69 लाख गांठ से करीब 14 प्रतिशत घटकर 2026-27 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में 280 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर अटक जाने की संभावना व्यक्त की है। एसोसिएशन के अनुसार कपास के बिजाई क्षेत्र में कमी आने तथा महाराष्ट्र, तेलंगाना एवं कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में सूखे का गंभीर संकट होने से रूई के कुल घरेलू उत्पादन में गिरावट आएगी।
2026-27 सीजन के लिए एसोसिएशन ने कपास की पैदावार एवं मांग-आपूर्ति की बैलेंस शीट का अपना पहला अनुमान जारी करते हुए कहा है कि उत्पादन, बकाया स्टॉक एवं विदेशों से आयात को मिलाकर रूई की कुल उपलब्धता 417.88 लाख गांठ पर पहुंच सकती है। इसमें 280 लाख गांठ का उत्पादन, 72.88 लाख गांठ का पिछला बकाया स्टॉक और 65 लाख गांठ का संभावित आयात शामिल है। केन्द्र सरकार ने रूई के आयात को 31 दिसम्बर 2026 तक सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया है।
एसोसिएशन के अनुसार 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में देश के अंदर रूई का कुल आयात तेजी से बढ़कर 71.60 लाख गांठ पर पहुंच गया जो कम से कम पिछले दो दशकों का सबसे ऊंचा स्तर है। यदि शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसम्बर से आगे बढ़ाई जाती है तो विदेशो से और अधिक मात्रा में रूई मंगाई जा सकती है। उल्लेखनीय है कि भारत में अमरीका, ब्राजील एवं ऑस्ट्रेलिया सहित कुछ अन्य देशों से रूई का आयात किया जाता है क्योंकि उसकी क्वालिटी अच्छी होती है।
एसोसिएशन घरेलू प्रभाग में रूई की खपत के अनुमान को 365 लाख गांठ के स्तर पर स्थिर रखते हुए देश से इसका निर्यात घटकर 12 लाख गांठ पर सिमटने की संभावना व्यक्त की है। सीजन के अंत में रूई का स्टॉक 40.88 लाख गांठ बचने का अनुमान है।