कपास की पैदावार नियत लक्ष्य एवं गत वर्ष से कम होने की संभावना

09-Oct-2025 01:51 PM

नई दिल्ली। कपास के घरेलू बिजाई क्षेत्र में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट आई है जबकि इसकी फसल को कई क्षेत्रों में नुकसान होने की सूचना मिल रही है।

ऐसा प्रतीत होता है कि घरेलू बाजार भाव नरम होने से खासकर गुजरात एवं महाराष्ट्र जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में कपास की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घटता जा रहा है।

2024-25 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में थोक मंडी भाव नीचे रहने से सरकारी एजेंसी भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लगभग 100 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) कपास खरीदने के लिए विवश होना पड़ा था। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। 

कपास का घरेलू उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 112.97 लाख हेक्टेयर से 2.94 लाख हेक्टेयर घटकर इस बार 110.03 लाख हेक्टेयर रह गया जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 129.50 लाख हेक्टेयर से करीब 19.50 लाख हेक्टेयर कम है।

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं पंजाब जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में अत्यधिक बारिश होने तथा कहीं-कहीं कीड़ों- रोगों का प्रकोप रहने से कपास की फसल क्षतिग्रस्त हो गई है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने कपास के उत्पादन का लक्ष्य 2024-25 के 350 लाख गांठ से घटाकर 2025-26 सीजन के लिए 335 लाख गांठ निर्धारित किया है लेकिन इसका वास्तविक उत्पादन 295-305 लाख गांठ से अधिक होना मुश्किल है।

2024-25 के सीजन में 307 लाख गांठ कपास का उत्पादन आंका गया था जिसके मुकाबले 2025-26 के सीजन में उत्पादन काफी कम होने की संभावना है।

यदि वास्तविक उत्पादन घटकर 290 लाख गांठ से भी नीचे आ जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। कपास के नए माल की तुड़ाई-तैयारी आरंभ हो गई है।

अत्यधिक वर्षा एवं खेतों में जल जमाव के कारण इस बार रूई की क्वालिटी भी प्रभावित होने की आशंका है। विदेशों से अच्छी क्वालिटी की रूई का भारी आयात हो रहा है।

सरकार ने 31 दिसम्बर 2025 तक रूई के आयात को शुल्क मुक्त कर दिया है। 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में देश के अंदर करीब 35-40 लाख गांठ रूई का आयात होने का अनुमान लगाया जा रहा है।