कपास की दैनिक आवक घटकर 90 हजार गांठ से नीचे आई
05-Mar-2025 05:56 PM
अहमदाबाद। एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में कपास की औसत दैनिक आवक घटकर 90 हजार गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) से नीचे आ गई है
जिसमें से 40-50 हजार गांठ की खरीद सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा की जा रही है और जिनर्स को मुश्किल से 40-45 हजार गांठ का स्टॉक प्राप्त हो रहा है जिनिंग मिलों को प्रतिदिन करीब एक लाख गांठ कपास की जरूरत पड़ती है। कॉटन जिनिंग मिलों ने कपास की खरीद को धीरे-धीरे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
कपास का थोक मंडी भाव फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कुछ नीचे चल रहा है और इसलिए जिनिंग इकाइयां इस मूल्य स्तर पर खरीद करके स्टॉक बनाने का प्रयास कर रही है ताकि आपूर्ति के ऑफ सीजन में इसका उपयोग किया जा सके।
कॉटन टेक्सक्टाइल मिलें ऊंचे दाम पर रूई की खरीद नहीं कर रही है और अपनी कीमतों के साथ ही चिपकी हुई है। टेक्सटाइल मिलें एक माह से अधिक समय के लिए कपास (रूई) का स्टॉक नहीं बनाना चाहती है।
प्रत्येक इकाई अधिक से अधिक एक माह की जरूरत को पूरा करने लायक स्टॉक रखना चाहती है ताकि मिलें चलती रहें।
भारतीय कपास निगम द्वारा चालू मार्केटिंग सीजन में 94 लाख गांठ से ज्यादा कपास की विशाल खरीद की जा चुकी है और मिलर्स को उम्मीद है कि कुछ समय के बाद निगम द्वारा इस स्टॉक की बिक्री आरंभ कर दी जाएगी।
आम धारणा यह है कि आपूर्ति की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद कपास का बाजार स्थिर हो जाएगा लेकिन यह भी माना जा रहा है कि जब तक आईसीई (इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज) में वायदा भाव तेज नहीं होता है तब तक भारतीय रूई के दाम में भी ज्यादा वृद्धि नहीं होगी।
प्रेस्ड रूई का भाव फिलहाल क्वालिटी के आधार पर 53000/54500 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) के बीच चल रहा है। समीक्षकों के अनुसार कपास बाजार का वर्तमान परिदृश्य चुनौतियों एवं अवसरों का संगम जैसा है।
कीमतों में तेजी-मंदी की हालत अनिश्चित बनी हुई है जबकि सरकारी स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है।
