कपास की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगा कॉटन मिशन
06-Feb-2025 03:09 PM
अहमदाबाद । वित्त वर्ष 2025-26 के केन्द्रीय आम बजट में 'कपास उत्पादकता के लिए पांच वर्षीय मिशन' की घोषणा की गई है जिससे रूई की उपज दर बढ़ाने तथा कीड़ों-रोगों के संक्रमण को रोकने में सहायता मिलेगी।
इस मिशन के अंतर्गत कपास की उच्च उपज दर वाली किस्मों के बीज का विकास करने पर जोर दिया जाएगा जिसमें रोग प्रतिरोधी क्षमता मौजूद हो।
यह मिशन ट्रांसजेनिक्स से आगे नई-नई तकनीक (जीन उत्पादन) का इस्तेमाल बढ़ाने में सहायता करेगा। इससे बेहतर क्वालिटी के सीड (बीज) का विकास संभव हो सकेगा।
देश के कुछ राज्यों में पिंक बॉलवर्म एवं सफेद मक्खी आदि के प्रकोप से कपास की फसल को अक्सर भारी नुकसान होता है। इस गंभीर समस्या को समाप्त करने की कोशिश भी की जाएगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीनस्थ- केन्द्रीय कपास अनुसंधान संस्थान इस मिशन के अंतर्गत केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर कपास की उत्पादकता एवं क्वालिटी सुधारने का उपाय करेगा।
इस मिशन के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस मिशन का उद्देश्य कपास (रूई) के उत्पादन एवं उपयोग के बीच अंतर को दूर करना है।
वर्तमान समय में आपूर्ति का अंतर करीब 25 लाख गांठ का हो उपज दर तथा पैदावार में वृद्धि होने से देश को रूई का निर्यात बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।
संस्थान के निदेशक का कहना है कि मिशन तात्कालिक उद्देश्य आपूर्ति का अंतर मिटाना है। मांग एवं आपूर्ति के बीच स्वस्थ समीकरण के लिए 40-50 लाख गांठ का अतिरिक्त उत्पादन हासिल करने की आवश्यकता है।
इसका मतलब यह हुआ कि अगले तीन वर्षों के अंदर रूई का घरेलू उत्पादन बढ़ाकर 360 लाख गांठ सालाना तक पहुंचाना होगा जबकि उसके आगे पांच वर्षों में इसका स्तर और भी बढ़ाकर 400 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) तक ले जाना होगा।
इसके साथ-साथ रूई की गुणवत्ता में भी सुधार लाने की आवश्यकता है। देश में एक्स्ट्रा लांग स्टैपल (ईएलएस) श्रेणी की रूई का सीमित उत्पादन होता है जबकि इसकी मांग अधिक रहती है।
इससे विदेशों से रूई के आयात की जरूरत पड़ती है। घरेलू उत्पादन बढ़ाकर रूई के आयात पर निर्भरता को समाप्त किया जा सकता है।
